महावीर के सर्वाेदय सिद्धांतों काे ग्रहण करने से मिलती है जीवन जीने की सच्ची कला : जयवीर सिंह

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महावीर के सर्वाेदय सिद्धांतों काे ग्रहण करने से मिलती है जीवन जीने की सच्ची कला : जयवीर सिंह


जैन विद्या शोध संस्थान का भव्य अलंकरण समारोह

लखनऊ, 05 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान की ओर से स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित निजी सहभागिता के अन्तर्गत स्थापित सात पुरस्कार संस्थान के अलंकरण समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रदान किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने मंत्री का स्वागत एवं सम्मान किया। संस्थान के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुये संस्थान की गतिविधियों से परिचय कराया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जयवीर सिंह ने कहा कि जीवन जीने की सच्ची कला महावीर के सर्वाेदय सिद्धांतों को ग्रहण करने से मिलती है। प्राचीन धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में संस्कृति विभाग उ.प्र. निरन्तर प्रयास करना है। जैन धर्म एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का भी विकास विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत सतत् किया जा रहा है।

’उद्देश्य पूर्ति के लिए संस्थान प्रयासरत’प्रो. अभय कुमार जैन ने बताया कि निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर संस्थान ने प्रदेश के 18 तीर्थंकरों की जन्म स्थानों पर संगोष्ठियों को आयोजित कर अहिंसा और अनेकान्त सिद्धांतों द्वारा विश्व शान्ति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने में सार्थक प्रयास। शाकाहार और सदाचार का प्रचार प्रसार। नैतिक शिक्षा और संस्कार शिवरों के माध्यम से प्रदेश भर के युवाओं में संस्कारों की अभिवृद्धि। वर्ष 2024 से गणतंत्र दिवस पर प्रदेश के श्रेष्ठ विद्वान को सम्मानित करना। वर्ष 2025 से 07 पुरस्कार स्थापित कर प्रितवर्ष 07 विद्वानों को सम्मानित करने का अभिनव कार्य। स्नातक पाठ्यक्रम तैयार कर शीघ्र ही कक्षाएं प्रारम्भ करने की दिशा में सार्थक प्रयास।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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