पूर्वांचल में 140 उद्यमों को सहयोग देगी जागृति
- सात जिलों में नए कोहोर्ट की तैयारी, बरपार स्थित बरगद सभागार में बनी रणनीति
- उद्यम कोर व मित्रों की बैठक में मोबिलाइजेशन और चुनौतियों पर हुई चर्चा
देवरिया, 20 फ़रवरी (हि.स.)। जागृति उद्यम केंद्र–पूर्वांचल के बरगद सभागार में शुक्रवार को पूर्वांचल के सात जिलों में कार्यरत उद्यम कोर और उद्यम मित्रों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल्द शुरू होने जा रहे नए कोहोर्ट की तैयारियों और उद्यमियों के चयन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। इन्क्यूबेशन निदेशक विश्वास पांडेय ने कहा कि वर्ष 2026–27 के लिए कुल 140 उद्यमों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया बहु-स्तरीय होगी जिसके लिए सातों जिलों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमियों को व्यवस्थित मार्गदर्शन, बाजार से जुड़ाव और वित्तीय समझ से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि सातों जिलों में मोबिलाइजेशन की गति और गुणवत्ता ही कार्यक्रम की सफलता तय करेगी। हमारा प्रयास है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी हो और वास्तव में उन उद्यमियों तक पहुंचे जिन्हें संरचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
डिजिटल सीओई मैनेजर अभिषेक भारद्वाज व उद्यम कोर दुर्गेश सिंह ने बताया कि जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, एनआरएलएम, खादी ग्रामोद्योग, डूडा, आरसेटी सहित विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं का सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे कार्यक्रम की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ रहे हैं। मैनेजर इंपैक्ट डॉ. खुशबू शर्मा ने कहा कि जागृति उद्यम केंद्र–पूर्वांचल अब तक 280 से अधिक उद्यमों को इन्क्यूबेशन सहयोग दे चुका है। इन उद्यमों के माध्यम से करीब 98.5 करोड़ रुपये का सामूहिक राजस्व सृजित हुआ है। साथ ही 5.07 करोड़ रुपये की फंडिंग सहायता उपलब्ध कराई गई है, जिससे 2,601 से अधिक रोजगार के अवसर बने हैं और 8,310 किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के आधार पर नए कोहोर्ट को और व्यापक बनाया जाना है।
बैठक में देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, संत कबीर नगर, बलिया व मऊ जिले के उद्यम कोर व उद्यम मित्र ने अपने क्षेत्र की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि मोबिलाइजेशन के दौरान सामने आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा की। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भ्रम और डिजिटल प्लेटफॉर्म की सीमित समझ को प्रमुख बाधाओं के रूप में चिन्हित किया गया। हालांकि, स्थानीय स्तर पर संवाद, परामर्श बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इन चुनौतियों को दूर करने के प्रयास जारी हैं।
इन्क्यूबेशन निदेशक विश्वास पांडेय ने बताया कि कृषि एवं कृषि-प्रसंस्करण, हस्तकला एवं स्थानीय शिल्प, कपड़ा एवं फैशन, सेवा क्षेत्र, डिजिटल स्टार्टअप, एफएमसीजी तथा अन्य नवाचार आधारित उद्यम आवेदन कर सकते हैं। चयन के दौरान प्रतिबद्धता, विस्तार की संभावना और रोजगार सृजन की क्षमता को प्रमुख आधार बनाया जाएगा ।
हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

