खाद्य प्रसंस्करण में निवेश से किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं को मिलेगा रोजगार : केशव प्रसाद मौर्य

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खाद्य प्रसंस्करण में निवेश से किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं को मिलेगा रोजगार : केशव प्रसाद मौर्य


लखनऊ, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा युवाओं के लिए व्यापक रोजगार अवसर उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एक प्रभावी माध्यम सिद्ध होगा।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास एवं हरित ऊर्जा को समान प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। सौर ऊर्जा आधारित औद्योगिक मॉडल भविष्य की आवश्यकता है, जो उद्योगों को लागत में राहत देने के साथ आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

उप मुख्यमंत्री ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों, अनुदानों एवं निवेश सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी प्रदेश में निवेश के लिए आगे आएं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।

इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल.मीणा की अध्यक्षता में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में गठित एप्रेजल समिति की बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक में प्राप्त 11 निवेश प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा एवं परीक्षण किया गया तथा निर्धारित शर्तों के साथ 09 को स्वीकृति हेतु संस्तुत किया गया। अप्रेजल समिति द्वारा 70 करोड़ के नौ पूर्ण प्रस्तावों को सशर्त एस.एल.ई.सी. के समक्ष प्रस्तुत किये जाने की संस्तुति की गयी। बरेली से दो, कानपुर नगर से एक, ललितपुर से एक, गोरखपुर से दो, बदायूँ से एक, लखनऊ से एक एवं हापुड़ से एक प्रस्ताव की संस्तुति की गयी।

मीणा द्वारा बताया गया कि 99 प्रतिशत लोन डिस्बर्समेण्ट के साथ पी.एम.एफ.एम.ई. में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। बताया गया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 अंतर्गत लेटर आफ कम्फर्ट औसतन 20 दिनों में निर्गत हो रहे हैं और स्वीकृत इकाईयां औसतन 200 दिनों में क्रियाशील हो रही हैं, जो पूर्व में 500 दिनों में होती थी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय

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