अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी उप्र के फर्रुखाबाद के आलू की मांग, रूस और इराक में निर्यात होगा कुफरी बहार आलू
फर्रुखाबाद ,22 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में आलू के बेहतर विपणन, गुणवत्ता संवर्धन एवं निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाराणसी के सहयोग से बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में एपीडा के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर ने प्रतिभाग करते हुए कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं एवं आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी दी।
जिलाधिकारी ने जनपद के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-जीएम (e-GM) पोर्टल पर जनपद का डाटा शीघ्र अपलोड कराने, गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा निर्यात योग्य गुणवत्तापूर्ण आलू के उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया।
जिलाधिकारी ने फर्रुखाबाद में आलू आधारित कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन, आधुनिक ग्रेडिंग, पैकेजिंग एवं सॉर्टिंग व्यवस्था विकसित करने तथा किसानों एवं व्यापारियों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक विशेष एफपीओ केवल आलू उत्पादन, गुणवत्ता संवर्धन एवं विपणन के क्षेत्र में कार्य करे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके, इसके साथ ही जनपद में मैंगो पल्प यूनिट स्थापित किए जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि जनपद में लगभग 43,400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू तथा 16.75 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की खेती की जाती है। जनपद में प्रतिवर्ष लगभग 15.53 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है, जिससे फर्रुखाबाद प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक जनपदों में शामिल है। एपीडा ने कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पंजीकरण, तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार विश्लेषण, प्रशिक्षण एवं विपणन संबंधी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
बैठक में बताया गया कि निर्यात के लिए 45 से 80 मिलीमीटर आकार के साफ, चिकने, बिना दाग-धब्बे तथा बिना कटे-फटे आलू की अधिक मांग रहती है, साथ ही निर्यातकों को परिवहन भाड़े पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है, जिससे निर्यात को और अधिक गति मिल सकती है।
आलू विकास अधिकारी ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग किया जाए तथा वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद एवं ढैंचा जैसी हरित खादों का उपयोग बढ़ाया जाए। उन्होंने बताया कि स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने से जल संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन एवं गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। जिलाधिकारी ने उपनिदेशक कृषि (प्रसार) कार्यालय को किसानों को मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि फर्रुखाबाद का आलू वर्तमान में सऊदी अरब, नेपाल, ओमान, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तथा श्रीलंका सहित विभिन्न देशों को निर्यात किया जा रहा है। हाल ही में रूस से 'कुफरी बहार' किस्म के आलू की मांग प्राप्त हुई है तथा इराक द्वारा भी भारत से आलू आयात को स्वीकृति प्रदान की गई है। ऐसे में जनपद के किसानों के लिए निर्यात की संभावनाएं और अधिक बढ़ी हैं।
एपीडा के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में एपीडा से अनुमोदित छह पैकिंग सेंटर संचालित हैं तथा वाराणसी स्थित एपीडा कार्यालय से किसान एवं निर्यातक तकनीकी एवं विपणन संबंधी आवश्यक सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने जनपद का डाटा नियमित रूप से पोर्टल पर अद्यतन करने तथा तकनीकी टीम को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी बल दिया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सहित कृषि, उद्यान एवं अन्य संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar

