देश को केवल डॉक्टर नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य के नेतृत्वकर्ता चाहिए : प्रो. संदीप कुमार सिंह
कानपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता ऐसे सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की है जो केवल रोगों के उपचार तक सीमित न रहें, बल्कि उनके मूल कारणों को समझकर समाज स्तर पर समाधान विकसित करें। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें परिवर्तनकारी नेतृत्व के लिए तैयार करना है। यह बातें मंगलवार को उन्नत सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. संदीप कुमार सिंह ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 'थिंकिंग लाइक ए पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल' के दौरान कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्वास्थ्य परास्नातक (एमपीएच) कार्यक्रम के तहत सामुदायिक सशक्तिकरण प्रयोगशाला, लखनऊ के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में नवप्रवेशित और वरिष्ठ विद्यार्थियों ने भाग लेकर रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य नीति, सामुदायिक सहभागिता, आंकड़ा विश्लेषण, कार्यक्रम प्रबंधन और कार्यान्वयन अनुसंधान से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने वास्तविक केस स्टडी, समूह गतिविधियों, समस्या आधारित अधिगम, हितधारक मानचित्रण, व्यवहार परिवर्तन संचार, निगरानी एवं मूल्यांकन, क्षेत्रीय योजना निर्माण और आंकड़ों की गुणवत्ता मूल्यांकन जैसे अभ्यासों में भाग लिया। विशेषज्ञों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के माध्यम से गैर-संचारी रोगों, नवजात मृत्यु दर, एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध और टीकाकरण की वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा की।
सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के निदेशक डॉ. अमित कुमार मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ऐसा विषय है जिसे केवल कक्षाओं में नहीं सीखा जा सकता। इसके लिए समुदाय के बीच जाकर समस्याओं को समझना, आंकड़ों का विश्लेषण करना और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभाव का मूल्यांकन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ वास्तविक क्षेत्रीय अनुभव भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अभिषेक मिश्रा ने कहा कि पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, अनुसंधान संस्थानों तथा विकास क्षेत्र की संस्थाओं में नेतृत्वकारी भूमिकाओं के लिए तैयार करता है। वहीं विशेषज्ञ विनय प्रताप सिंह ने रोगों की रोकथाम को उपचार से अधिक प्रभावी बताया। डॉ. मालविका मिश्रा ने साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि अनुष्का श्रीवास्तव ने कहा कि समुदाय की भागीदारी के बिना कोई भी स्वास्थ्य कार्यक्रम सफल नहीं हो सकता।
कार्यशाला के समापन पर विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति उनकी समझ को व्यापक बनाया है और अब वे इसे केवल एक शैक्षणिक पाठ्यक्रम नहीं बल्कि समाज में बदलाव लाने के माध्यम के रूप में देख रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्कूल के सहायक निदेशक डॉ. मानस उपाध्याय, डॉ. प्रशांत, डॉ. अंशू सिंह सहित संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

