परिवार नियोजन के अस्थाई साधनों में बढ़ रही रुचि, 'अंतरा' बनी महिलाओं की पसंद

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परिवार नियोजन के अस्थाई साधनों में बढ़ रही रुचि, 'अंतरा' बनी महिलाओं की पसंद


अंतरा इंजेक्शन का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या में साल दर साल इजाफा

वाराणसी, 11 जुलाई (हि.स.)। दो बच्चों के बीच में अंतराल लेना हो या फिर परिवार पूरा हो चुका है, ऐसी स्थिति में महिलाओं को परिवार नियोजन के लिए अस्थायी साधनों में से एक 'अंतरा' तिमाही गर्भ निरोधक इंजेक्शन खूब भा रहा है। इसी का परिणाम है कि जनपद में साल दर साल अंतरा का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा हो रहा है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफ़एचएस) वर्ष 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 2.3 प्रतिशत लाभार्थियों ने 'अंतरा' इंजेक्शन का लाभ लिया, जबकि वर्ष एनएफ़एचएस वर्ष 2015-16 में यह 0.3 प्रतिशत था। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में तीन से चार हजार महिलाएं इसका लाभ लेती थीं जो वर्ष 2024 में बढ़कर 16 हजार से अधिक हो गई है।

महिलाओं का मानना है कि अनचाहे गर्भ हो या दो बच्चों के बीच अंतराल रखना हो या फिर परिवार पूरा हो चुका हो, तो ऐसे में अंतरा उनके लिए सुरक्षित, कारगर और आसान साधन है।

लाभार्थियों ने सराहा

सेवापुरी ब्लॉक के बबुआपुर निवासी 26 वर्षीय सुनीता (काल्पनिक नाम) ने बताया 'मेरा एक बच्चा है और मैं अभी बच्चा नहीं चाहती हूँ। इसलिए पीएचसी पर ही अंतरा इंजेक्शन की पहली डोज़ डॉक्टर मैडम की देखरेख में लगवायी। मुझे बताया गया कि इस इंजेक्शन को लगवाने से तीन माह तक गर्भ ठहरने से सुरक्षा मिल जाती है।

काशी विद्यापीठ ब्लॉक के सरहरी निवासी 32 वर्षीय अंजली (काल्पनिक नाम) का परिवार पूरा हो चुका है और अब तक वह अंतरा की छह डोज़ लगवा चुकी हैं। सेवापुरी पीएचसी की महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ शालिनी ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी खासकर खुशहाल परिवार दिवस, अंतराल दिवस, पीएसएमए दिवस पर लाभार्थी और दंपत्ति परिवार नियोजन के लिए परामर्श लेने आ रहे हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी के अनुसार रीप्रोडक्टिव हेल्थ में सुधार लाने के लिए परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधनों पर ज़ोर दिया जा रहा है। ग्रामीण समेत शहरी क्षेत्र में भी लाभार्थी और दंपत्ति अपनी समझ के अनुसार साधनों का उपयोग कर रहे हैं। इसके लिए जिला महिला चिकित्सालय पर परिवार नियोजन परामर्शदाता, सीएचसी-पीएचसी पर स्टाफ नर्स व एएनएम और आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) परामर्श दे रहे हैं।

नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ एचसी मौर्या ने बताया कि अंतरा लगवाने पर लाभार्थी महिला को 100 रुपये प्रति डोज़ की प्रोत्साहन राशि मिलती है। जबकि कॉपर टी लगवाने पर 300 रुपये की धनराशि मिलती है।

उपलब्ध है 'बास्केट ऑफ च्वोइस'

अस्थायी साधनों में अंतरा के साथ-साथ छाया साप्ताहिक गोली, माला एन, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली (ईसीपीपी) और कंडोम को शामिल किया गया है। इन साधनों को ‘बास्केट ऑफ च्वाइस’ के रूप में जिला महिला चिकित्सालय समेत ग्रामीण व शहरी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, आयुष्मान आरोग्य केन्द्रों में प्रदर्शित और उपलब्ध किया गया है।

एक नज़र आंकड़ों पर

वर्ष 2021-22 में जनपद में 7065 अंतरा इंजेक्शन, 26324 छाया, 31326 कॉपर टी और 716189 कंडोम का लाभ लिया। वर्ष 2022-23 में 13358 अंतरा इंजेक्शन, 38182 छाया, 25879 कॉपर टी और 1083273 कंडोम का लाभ लिया। वर्ष 2023-24 में 16728 अंतरा इंजेक्शन, 42036 छाया, 28504 कॉपर टी और 999418 कंडोम का लाभ लाभार्थियों ने लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी / राजेश

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