विवेकानंद के कर्मयोग से ही साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : वेंकटेश्वरलू

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विवेकानंद के कर्मयोग से ही साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : वेंकटेश्वरलू


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विवेकानंद के कर्मयोग से ही साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : वेंकटेश्वरलू




गोरखपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वरलू ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। यह चरित्र निर्माण, आत्मबल और राष्ट्र सेवा पर आधारित है। विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और आम नागरिक यदि अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन विवेकानंद के कर्मयोग आदर्शों के अनुरूप करें, तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया स्वतः तेज हो जाएगी। विकसित भारत का संकल्प स्वामी विवेकानंद के कर्मयोग से ही साकार होगा।

एल. वेंकटेश्वरलू सोमवार को महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़, गोरखपुर में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर 12 से 26 जनवरी तक चलने वाले भारत-भारती पखवाड़ा के उद्घाटन कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज जब देश प्रशासनिक सुधार, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है, तब कर्मयोग आधारित कार्य संस्कृति की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। केवल योजनाओं की घोषणा से देश विकसित नहीं बनता, बल्कि उन्हें ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने वाले कर्मयोगी ही राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अश्वनी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जयंती केवल एक महान संत की स्मृति नहीं, बल्कि राष्ट्र जागरण का दिवस है। युवाओं में आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और कर्मनिष्ठा का संचार करने वाले स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इसी विचारधारा से प्रेरित मिशन कर्मयोग, विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। स्वामी विवेकानंद ने कर्म को पूजा और सेवा को साधना माना। उनका स्पष्ट संदेश था कि राष्ट्र का उत्थान केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि निष्काम कर्म और सेवा भावना से होता है। मिशन कर्मयोग इसी भावना को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाते हुए नागरिकों को कर्तव्यनिष्ठ, दक्ष और उत्तरदायी बनने के लिए प्रेरित करता है।

मिशन कर्म योग एवं विकसित भारत विषय पर उद्बोधन देते हुए अश्वनी ने कहा कि आज जब देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब विवेकानंद के कर्मयोग विचारों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। सशक्त युवा, नैतिक प्रशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व, ये सभी तत्व स्वामी विवेकानंद के दर्शन और मिशन कर्मयोग के मूल में निहित हैं। उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोग का मूल उद्देश्य नागरिकों में कर्तव्यबोध, दक्षता और नैतिकता का विकास करना है। यह मिशन इस विचार को सशक्त करता है कि प्रत्येक कार्य चाहे वह छोटा हो या बड़ा, यदि निष्ठा और ईमानदारी से किया जाए, तो वह राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कर्मयोग की यही भावना भारतीय दर्शन की आत्मा रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यदि राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक अपने कर्म को योग बना ले, तो भ्रष्टाचार, लापरवाही और अकर्मण्यता जैसी समस्याएँ स्वतः ही समाप्त होने लगेंगी। यही वह आधार है, जिस पर एक सशक्त, समृद्ध और विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि निस्संदेह, मिशन कर्मयोग केवल एक अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का आंदोलन है।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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