तकनीकी युग में भारतीय ज्ञान परंपरा से विद्यार्थियों को जोड़ना शिक्षकों का कर्तव्य : डॉ रश्मि गोरे

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तकनीकी युग में भारतीय ज्ञान परंपरा से विद्यार्थियों को जोड़ना शिक्षकों का कर्तव्य : डॉ रश्मि गोरे


कानपुर, 12 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में कल्याणपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की तरफ से स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का विषय धर्म और कर्तव्य शिक्षा के माध्यम से युवा जीवन का संतुलनथा। यह जानकारी सोमवार को विभागध्यक्ष डॉ रश्मि गोरे ने दी।

विभागाध्यक्ष डॉ रश्मि गोरे ने बताया कि आधुनिक तकनीकी के इस युग में भारतीय ज्ञान परंपरा से अपने विद्यार्थियों को जोड़ कर रखना शिक्षकों का अनिवार्य कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब इस प्रकार के कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन किया जाता रहे।

डॉ अमित कुमार मिश्रा व डॉ0 मानस उपाध्याय ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही भारतीय संस्कृति आधारित ज्ञान परीक्षा से संबंधित जानकारी प्रदान की साथ ही उन्हें इस परीक्षा में भाग लेने के लिए प्रेरित भी किया।

डॉक्टर बद्री नारायण मिश्र ने कहा कि ऐसे अवसरों पर आयोजित होने वाली परिचर्चाएं विद्यार्थियों में बौद्धिकता का विकास करती हैं।

कार्यक्रम संयोजिका डॉ0 रत्नर्त्तु मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को मूर्त रूप देने में युवाओं की सहभागिता में वृद्धि के लिए स्वामी विवेकानंद जैसे विचारों के विचार आज भी प्रासंगिक हैं । परिचर्चा में अंजुली आरती, दिव्या राजपूत, राशि, प्रशांत, मंजुला, विष्णु, अविरल आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन अर्चिता और अजीत ने किया।

इस मौके पर डॉ0 गोपाल सिंह, डॉ0 तनुजा भट्ट, डॉ0 कुलदीप सिंह, श्रीमती प्रिया तिवारी, डॉ0 स्नेहा पांडे आदि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

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