एआई के जरिये छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करना जरूरी : अमित कटारिया
कानपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। विश्वविद्यालयों में एआई को केवल तकनीक के रूप में सिखाने के बजाय छात्रों को इसके व्यावहारिक इस्तेमाल और रोजगार के लिए तैयार किया जाना चाहिए। डिग्री के साथ छात्रों के पास वास्तविक प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो और व्यावहारिक अनुभव भी होना जरूरी है। यह बातें शनिवार को सरस एआई के अमित कटारिया ने एआई मंथन 2.0 के पहले दिन के अंतिम सत्र ‘प्रोटोटाइप टू प्रैक्टिस : एआई प्रोडक्ट्स फॉर यूनिवर्सिटी ट्रांसफॉर्मेशन’ में कही।
उन्होंने कहा कि कंपनियां अब केवल डिग्री के आधार पर युवाओं का चयन नहीं करतीं, बल्कि उनके व्यावहारिक कौशल और किए गए प्रोजेक्ट को भी देखती हैं। सरस एआई का उद्देश्य छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश के पहले दिन से एआई के लिए तैयार करने के साथ उनका व्यावहारिक पोर्टफोलियो तैयार करना है। इसके तहत छात्र वास्तविक समस्याओं पर काम कर अपने प्रोजेक्ट और तकनीकी कार्य को प्रदर्शित कर सकेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों से रोजगार केंद्रित एआई लर्निंग पाथवे शुरू करने की अपील की।
सत्र में ओवरलैब्स के संस्थापक अभि आनंद ने हस्तलिखित उत्तर पुस्तिकाओं के एआई आधारित मूल्यांकन का प्रोटोटाइप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सीएसजेएमयू में करीब 150 विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं पर इसका प्रयोग किया गया है। प्रणाली एक दिन में करीब 20 हजार उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की क्षमता रखती है। अंतिम निर्णय और अंकों में बदलाव का अधिकार फैकल्टी के पास ही रहेगा। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक प्रोफेसर इस प्रणाली से जुड़े हैं।
गेस्टोरा सॉल्यूशंस के आदर्श पाठक ने एआई आधारित छात्र शैक्षणिक रिकॉर्ड सत्यापन प्रणाली प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि ‘Vidyapanji.ai’ के जरिये छात्र डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट और अन्य शैक्षणिक सेवाओं के लिए अनुरोध कर सकता है। एआई दस्तावेजों की जानकारी को विश्वविद्यालय के डिजिटल रिकॉर्ड से मिलाकर सही, गलत या समीक्षा योग्य स्थिति सामने रखता है।
कोडक्लाउड के शशांक कृपाल ने कहा कि केवल एआई टूल और प्रॉम्प्टिंग की जानकारी पर्याप्त नहीं है। छात्रों को एआई आधारित तकनीकों पर वास्तविक रूप से काम करने और प्रोजेक्ट बनाने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए प्लेटफॉर्म पर जीपीयू, वर्चुअल मशीन, सैंडबॉक्स, लैब और हैकथॉन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
ग्रेडस्मिथ के ईशान कपूर ने एआई आधारित मूल्यांकन प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में करीब तीन लाख उत्तर पुस्तिकाओं का एआई से मूल्यांकन किया गया, जिससे करीब 75 हजार घंटे का फैकल्टी समय बचा। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म अब तक करीब 20 विश्वविद्यालयों के साथ काम कर चुका है।
इनफिनिटी इन्फोवे लिमिटेड के निकुंज गजेरा ने विश्वविद्यालय की प्रक्रियाओं को एआई से जोड़ने के समाधान प्रस्तुत किए। इनमें एआई आधारित प्रश्नपत्र निर्माण, प्रश्न बैंक, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, स्वचालित प्रिंटिंग, प्रवेश प्रक्रिया में सहायता और विश्वविद्यालय की समयसीमा की निगरानी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
सुमेरू एडुटेक के चिंतन ओझा ने शिक्षा के लिए विकसित एआई मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छह छोटे भाषा मॉडल विकसित किए गए हैं, जिनका उपयोग छात्रों के लिए व्यक्तिगत शिक्षण, अध्ययन सामग्री, माइंड मैप और मूल्यांकन तैयार करने में किया जा सकता है। इसके लिए UniExcel प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है।
सत्र में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल और सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक मौजूद रहे। कुलाधिपति ने प्रस्तुतकर्ताओं से उनके समाधानों को लेकर सवाल किए और बजट से संबंधित जानकारी भी ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के संजीव सिंह ने प्रस्तुतकर्ताओं का परिचय कराया। सत्र के अंत में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और विद्वानों ने सभी प्रस्तुतकर्ताओं को सम्मानित किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

