स्वदेशी दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देगा आईआईटी कानपुर-बीएसएनएल सहयोग : प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल

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स्वदेशी दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देगा आईआईटी कानपुर-बीएसएनएल सहयोग : प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल


कानपुर, 11 जून (हि.स.)। भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने तथा अगली पीढ़ी की दूरसंचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने एक रणनीतिक समझौता किया है। यह साझेदारी अनुसंधान, नवाचार, परीक्षण, कार्यान्वयन और स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण को नई गति प्रदान करेगी। यह बातें गुरुवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहीं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और बीएसएनएल के बीच हाल ही में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दूरसंचार और डिजिटल क्षेत्र में उभरती तकनीकों पर दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करना है।

एमओयू पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल और बीएसएनएल के पीजीएम जितेंद्र गर्ग ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. अभय करंदीकर, बीएसएनएल के सीएमडी ए. रॉबर्ट जे. रवि, बिसनौली सर्वोदय फाउंडेशन की सीईओ नंदिता बख्शी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता और संकाय सदस्य मौजूद रहे।

यह साझेदारी आईआईटी कानपुर की अनुसंधान एवं नवाचार क्षमता को बीएसएनएल के देशव्यापी दूरसंचार नेटवर्क और परिचालन अनुभव के साथ जोड़ने का कार्य करेगी। दोनों संस्थान मिलकर स्वदेशी तकनीकों के विकास, परीक्षण, कार्यान्वयन और व्यावसायीकरण की दिशा में काम करेंगे।

सहयोग का प्रमुख केंद्र डायरेक्ट-टू-मोबाइल (डी2एम) प्रसारण तकनीक होगा, जिसमें आईआईटी कानपुर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से मोबाइल फोन पर मल्टीमीडिया सामग्री सीधे प्रसारित की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डी2एम तकनीक शिक्षा, जनहित सूचनाओं, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन चेतावनी संदेशों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इसके अलावा यह सहयोग 4जी, 5जी और भविष्य की संचार तकनीकों, भारतनेट आधारित डिजिटल अनुप्रयोगों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड एवं एज कंप्यूटिंग, उन्नत वायरलेस तकनीकों, सुरक्षित डेटा संचार प्रणालियों और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों को भी कवर करेगा।

दोनों संस्थान संयुक्त रूप से अनुसंधान परियोजनाओं, पायलट प्रोजेक्ट, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट, फील्ड ट्रायल, क्षमता निर्माण, स्टार्टअप सहयोग, बौद्धिक संपदा सृजन और मानकीकरण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। इस पहल से डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश के डिजिटल अवसंरचना तंत्र को भी नई शक्ति मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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