आईआईटी कानपुर समर्थित धनवृत्ति वेंचर्स को सेबी की मंजूरी
कानपुर, 09 जून (हि.स.)। आईआईटी कानपुर द्वारा प्रायोजित धनवृत्ति वेंचर्स को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से कैटेगरी-1 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) के रूप में पंजीकरण मिल गया है। यह उत्तर प्रदेश का पहला आईआईटी समर्थित सेबी-पंजीकृत वेंचर कैपिटल फंड है, जो डीप-टेक स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों को निवेश एवं संस्थागत सहयोग प्रदान करेगा। यह जानकारी मंगलवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने दी।
धनवृत्ति वेंचर्स की स्थापना आईआईटी कानपुर और उसके पूर्व छात्रों के सहयोग से की गई है। फंड का मुख्य फोकस उन्नत इंजीनियरिंग सामग्री, रक्षा प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु प्रौद्योगिकी और अन्य डीप-टेक क्षेत्रों में काम कर रहे शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स पर रहेगा। फंड इन उद्यमों को पूंजी के साथ-साथ आईआईटी कानपुर की अनुसंधान सुविधाओं, विशेषज्ञ संकाय और पूर्व छात्र नेटवर्क तक पहुंच भी उपलब्ध कराएगा।
धनवृत्ति वेंचर्स के प्रबंध भागीदार एवं आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र अनुराग सिंह ने कहा कि यह मंजूरी कई वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक निवेश फंड नहीं, बल्कि आईआईटी कानपुर के शोध को बाजार तक पहुंचाने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि महान शैक्षणिक संस्थान केवल ज्ञान का सृजन नहीं करते बल्कि उसे समाज और अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी समाधानों में भी बदलते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फंड कानपुर और उत्तर प्रदेश को डीप-टेक उद्यमिता के प्रमुख केंद्रों में स्थापित करने में मदद करेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कहा कि एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में डीप-टेक और नवाचार आधारित निवेश बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यह फंड प्रदेश में उच्च-मूल्य रोजगार और विश्वस्तरीय तकनीकी कंपनियों के विकास को गति देगा। आईआईटी कानपुर के नवाचार तंत्र के साथ मिलकर संचालित होने वाला यह फंड राज्य के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती प्रदान करेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

