ट्रिपल आईटी इलाहाबाद ने चेक गणराज्य की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑस्ट्रावा के साथ किया एमओयू, शैक्षणिक एवं अनुसंधान काे मिलेगा बढ़ावा

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ट्रिपल आईटी इलाहाबाद ने चेक गणराज्य की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑस्ट्रावा के साथ किया एमओयू, शैक्षणिक एवं अनुसंधान काे मिलेगा बढ़ावा


प्रयागराज, 20 जनवरी (हि.स.)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद ने यूरोपीय संघ के प्रतिष्ठित एरास्मस कार्यक्रम के अंतर्गत चेक गणराज्य की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑस्ट्रावा के साथ एक पूर्णतः वित्तपोषित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक गतिशीलता (एकेडमिक मोबिलिटी) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता वैश्विक शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह जानकारी मंगलवार को ट्रिपल आईटी के पीआरओ डॉ पंकज मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि एरास्मस यूरोपीय संघ का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो शिक्षा, प्रशिक्षण, युवा विकास और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। इसके अंतर्गत छात्र एवं संकाय विनिमय को पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अनुभव, कौशल विकास और संयुक्त शोध गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने बताया कि इस समझौता ज्ञापन की पहल ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग की डॉ. रेखा वर्मा एवं डॉ. सितांशु भट्टाचार्य द्वारा संयुक्त रूप से की गई है।

समझौते के तहत ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के पाँच बीटेक एवं एमटेक विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ ऑस्ट्रावा में अधिकतम तीन माह के लिए पूर्णतः वित्तपोषित शैक्षणिक प्रवास का अवसर प्राप्त होगा। इस वित्तपोषण में अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वीजा शुल्क, आवास एवं जीवन-यापन व्यय सम्मिलित है। साथ ही पूर्ण अकादमिक क्रेडिट ट्रांसफर की व्यवस्था भी की गई है, जिससे छात्रों की डिग्री में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

इसके अतिरिक्त, ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के संकाय सदस्यों को भी 7 से 10 दिनों के पूर्णतः वित्तपोषित अल्पकालिक शिक्षण अथवा शोध प्रवास का अवसर मिलेगा, जिससे संयुक्त शिक्षण, अनुसंधान एवं शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि यह पहल छात्रों एवं संकाय सदस्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन, अनुसंधान अनुभव तथा वैश्विक सहभागिता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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