ऐतिहासिक हुलासखेड़ा को पर्यटन स्थल के रूप में दिलायी जायेगी पहचान : जयवीर सिंह

WhatsApp Channel Join Now
ऐतिहासिक हुलासखेड़ा को पर्यटन स्थल के रूप में दिलायी जायेगी पहचान : जयवीर सिंह


लखनऊ, 23 जुलाई (हि.स.)। राजधानी लखनऊ के समीप मोहनलालगंज स्थित प्राचीन स्थल हुलासखेड़ा के संरक्षण, संवर्द्धन एवं पर्यटन विकास हेतु विभिन्न कार्य चरणबद्ध रूप से कराये जा रहे हैं। यह स्थल ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में पर्यटन विभाग द्वारा यहां स्थल विकास कार्य कराये जा रहे हैं, जिसमें ओपेन एम्फीथीएटर, टॉयलेट ब्लॉक, कैफेटेरिया तथा आकर्षक लैण्ड स्केपिंग शामिल है। इस संरक्षित पुरास्थल को एक उत्कृष्ट विरासत के रूप में स्थापित कर पर्यटन के लिहाज से तैयार किया जा रहा है। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि इस संरक्षित प्राचीन स्थल पर पिछले वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय लखनऊ द्वारा प्रथम चरण में 175 लाख रुपये की लागत साइट संरक्षण का कार्य पूरा कराया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में द्वितीय चरण के अंतर्गत 169 लाख रुपये की विस्तृत परियोजना का डीपीआर तैयार कराया गया है। इसको शीघ्र ही अनुमोदित कर दिया जायेगा और द्वितीय चरण के संरक्षण का कार्य शुरू करा दिया जायेगा।

उन्होंने बताया कि प्रथम एवं द्वितीय चरण के संरक्षण कार्य तथा पर्यटन विभाग द्वारा कराये जा रहे आधारभूत पर्यटन अवसंरचना विकास कार्यों के पूरा होने के उपरान्त हुलासखेड़ा उत्खनन स्थल प्रदेश के प्रमुख पुरातात्विक एवं विरासत पर्यटन स्थलों में एक अलग पहचान स्थापित करेगा। साथ ही शोध, शिक्षा एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि यह प्राचीन पुरातात्विक स्थल लगभग 3000 वर्ष पुरानी दबी हुई सभ्यता, ईटों से बनी प्राचीन सड़कों और युद्ध के देवता कार्तिकेय की सोने के पत्ते से बनी हुई दुर्लभ मूर्ति के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां पहली बार लगभग 1000 ई.पूर्व लौह युग में लोगों ने रहना शुरू किया था।

इस स्थान की वैज्ञानिक खुदाई में मौर्य, शुंग, कुशाण और गुप्त काल की कई परतें सामने आयी हैं। यहां से मिली वस्तुओं से पता चलता है कि उस समय उन्नत तकनीक और निर्माण कला को अपनाया जाता था। यहां उच्चकोटि के मिट्टी के बर्तन (मृद्भाण्ड), टेराकोटा (पक्की मिट्टी) की मूर्तियां, प्राचीन सिक्के और लौह उपकरण प्राप्त हुए हैं। भगवान कार्तिकेय की सोने के पत्र पर उकेरी गई अनूठी आकृति सबसे खास खोज है, जिसे अब लखनऊ स्थित राज्य संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

Share this story