स्वस्थ मन, सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति बेहतर जीवन का आधार : सतीश महाना

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स्वस्थ मन, सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति बेहतर जीवन का आधार : सतीश महाना


स्वस्थ मन, सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति बेहतर जीवन का आधार : सतीश महाना


कानपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। स्वस्थ जीवन के लिए केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक संतुलन भी जरूरी है। मन और विचार सकारात्मक होंगे तो स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। युवाओं को समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उनके समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए। यह बातें शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित वेलनेस कॉन-2026 के तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहीं।

उन्होंने अपनी बाईपास सर्जरी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने चिकित्सकों से एक महीने में स्वस्थ होने का लक्ष्य रखा था, क्योंकि उन्हें विधानसभा का संचालन करना था। उन्होंने कहा कि युवाओं को तकनीक का उपयोग करना सीखना चाहिए, न कि स्वयं उसके नियंत्रण में आना चाहिए। वर्ष 2047 में विकसित भारत का सपना युवाओं की मेहनत और संकल्प से ही साकार होगा। व्यक्ति को अपने ज्ञान, धन और संस्कारों को दूसरों के साथ साझा करने की भावना भी विकसित करनी चाहिए।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूकता बढ़ी है। भारतीय चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद, वेदों और प्राचीन ऋषियों के ज्ञान में स्वास्थ्य को लेकर व्यापक दृष्टिकोण मौजूद है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान का वैज्ञानिक अध्ययन और समन्वय स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा साइंस की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा की।

सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन से पूर्व आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। प्रथम सत्र में एचआईएमएस सफेदाबाद के प्रो. डॉ. संजय श्रीवास्तव ने जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए उचित संवाद शैली और स्वस्थ मानसिकता के महत्व को समझाया। उन्होंने ओशो, लियोनार्डो दा विंची, आइंस्टीन और महाभारत के उदाहरण दिए। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने चिकित्सा शिक्षा में खुशी, मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को मानसिक दबाव से बचाने के लिए उचित परामर्श और मार्गदर्शन जरूरी है। चिकित्सक स्वयं स्वस्थ होंगे, तभी मरीजों को बेहतर उपचार दे सकेंगे। प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. शरद बाजपेयी ने ध्यान और सक्रिय जीवनशैली को स्वस्थ आंखों के लिए जरूरी बताया।

वहीं, तीसरे उद्बोधन सत्र में पद्मश्री प्रो. सुरेश हनगवाड़ी ने हीमोफीलिया और आनुवंशिक रक्तस्राव संबंधी बीमारियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के मरीजों के लिए केवल रक्तस्राव नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ जीवन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उचित उपचार और पारिवारिक सहयोग से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने अपने हीमोफीलिया से पीड़ित होने का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह करीब 30 वर्षों से चिकित्सा शिक्षण और मरीजों की स्थिति सुधारने के लिए काम कर रहे हैं। उनके केंद्र की ओर से दूरदराज के मरीजों को आपातकालीन सहायता देने के लिए मोबाइल चिकित्सा सेवा भी संचालित की जा रही है।

सत्र की कार्यक्रम निदेशक डॉ. अलका शर्मा रहीं। अध्यक्षता डॉ. एसएन सिंह और डॉ. यशवंत कुमार राव ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक, प्रो. सुधांशु पांड्या, प्रो. राजेश कुमार त्रिवेदी, प्रो. एसके कटियार, जीवीएम के प्राचार्य डॉ. संजय काला और डॉ. एएस प्रसाद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Livevns.news Desk
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