डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को किया प्रशिक्षित : डॉ. राजेश्वर सिंह
कानपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। डेंगू, मलेरिया और फाइलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को लगातार निगरानी, जांच और निरोधात्मक कार्रवाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म कर इन बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। यह बातें गुरुवार को नोडल अधिकारी (वीबीडी) डॉ. राजेश्वर सिंह ने चौबेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान कहीं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि दत्त नेमि के निर्देश पर डॉ. राजेश्वर सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी अरुण कुमार सिंह, मलेरिया निरीक्षक गौतम पुरवार और सहयोगी संस्था पाथ के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. शिवकांत ने चौबेपुर सीएचसी का निरीक्षण किया। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को डेंगू, मलेरिया व फाइलेरिया से बचाव, रोकथाम और नियंत्रण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
प्रयोगशाला कक्ष का निरीक्षण कर डेंगू और मलेरिया की त्वरित जांच किट उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा भौंती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत भौंती गौशाला का निरीक्षण कर बुखार सर्वेक्षण, जांच, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और अन्य निरोधात्मक गतिविधियों का भौतिक सत्यापन किया गया। लोगों को घरों और आसपास पानी जमा न होने देने के लिए जागरूक किया गया।
दादानगर, बर्रा-3, यशोदानगर, गुमटी नंबर-5 और रतनलाल नगर में डेंगू के मामले सामने आए थे, जबकि भगवंतपुर सचेंडी क्षेत्र में मलेरिया का मामला मिला था। इन क्षेत्रों में आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई पूरी कराई गई है।
विभिन्न क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों का सर्वेक्षण, उन्हें नष्ट करने, लार्वानाशक छिड़काव और जागरूकता अभियान चलाया गया। धनकुट्टी, एमटीसी ग्वालटोली, घाऊखेड़ा, कुली बाजार, गोविंद नगर, मुंशीपुरवा, निहूरा गांव, कपली गांव, रावतपुर, मोतीझील, नवीन नगर काकादेव, गुजैनी, बर्रा-4 और पशुपति नगर समेत कई इलाकों में 944 घरों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें आठ घरों में लार्वा मिले, जबकि 15 घरों में लार्वा नष्ट कराया गया। कुल 7,135 पात्रों का सर्वेक्षण किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

