याेगी सरकार की पहल पर कानपुर में संवर रही 'गोवंश की सेहत
-15 हजार से ज्यादा बेसहारा गोवंश को मिला सुरक्षित ठिकाना, 75 गौशालाओं में बदली तस्वीर-70 अस्थायी और 5 वृहद केंद्रों में बेहतर हुई देखभाल, बारिश के मौसम में स्वास्थ्य जांच और चारे का विशेष इंतजाम
कानपुर, 29 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश भर में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और उनकी बेहतर देखभाल को लेकर बेहद गंभीर रुख अपनाए हुए है। इसी नीति के तहत कानपुर जिले में एक व्यापक और योजनाबद्ध अभियान चलाकर हजारों बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाया गया है। गोवंश को नया सहारा मिला है। पूरे जिले में पशु संरक्षण की एक मजबूत व्यवस्था भी तैयार हो गई है।
ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक मजबूत ढांचा
कानपुर जिले में बेसहारा जानवरों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए 75 गौशालाएं पूरी सक्रियता के साथ काम कर रही हैं। इन सभी संरक्षण केंद्रों में शासन की गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जिले की सभी छोटी-बड़ी गौशालाओं को मिलाकर अब तक कुल 15,012 बेसहारा गोवंश को संरक्षित कर उन्हें सुरक्षित माहौल दिया गया है।
अस्थायी और स्थाई संरक्षण केंद्रों का पूरा लेखा-जोखा
जिला प्रशासन ने बेसहारा मवेशियों को ठहराने के लिए दो स्तरों पर व्यवस्था की है। ग्रामीण इलाकों में 70 अस्थायी गौशालाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें 6,654 गोवंश का रखरखाव हो रहा है।
वहीं, लंबी अवधि और बेहतर देखभाल के उद्देश्य से पांच बड़े वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जो स्थाई रूप से काम कर रहे हैं। इन पांच बड़े स्थाई केंद्रों में 2,082 गोवंश को रखा गया है। इस तरह केवल ग्रामीण और बड़े केंद्रों को मिलाकर ही 8,736 मवेशी सुरक्षित किए जा चुके हैं।
शहरी निकायों में कसा गया शिकंजा
शहरी क्षेत्रों में घूमते आवारा जानवरों से लोगों को निजात दिलाने के लिए स्थानीय निकायों की भूमिका तय की गई है। नगरीय सीमा के भीतर छह गौशालाएं संचालित हो रही हैं। इनमें नगर पंचायतों की गौशालाओं में 260 और नगर पालिका परिषद क्षेत्रों में 141 गोवंश को आसरा मिला है। वहीं, सबसे बड़ी राहत कानपुर नगर निगम क्षेत्र में देखने को मिली है, जहां दो बड़ी गौशालाओं के भीतर रिकॉर्ड 5,875 बेसहारा गोवंश को संरक्षित किया गया है।
बारिश के मौसम में स्वास्थ्य और चारे की विशेष निगरानी
गौशालाओं में मवेशियों को केवल बंद रखने के बजाय उनके खान-पान और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बारिश के मौजूदा मौसम को देखते हुए सभी केंद्रों पर कीचड़, जलभराव और संक्रामक बीमारियों से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पशुपालक कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि चारे और पीने के साफ पानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही पशुचिकित्सकों की टीमें नियमित रूप से गौशालाओं का दौरा कर रही हैं।
कानपुर के मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने बुधवार को बताया कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुसार, जिले में बेसहारा गोवंश को संरक्षित करने का काम लगातार जारी है। पूरे जिले की गौशालाओं में गोवंश की देखभाल पूरी निष्ठा के साथ की जा रही है। मानसून को देखते हुए सभी गौशालाओं में पर्याप्त मात्रा में भूसा, हरा चारा, दवाएं और टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है। हमारी टीमें मौके पर जाकर सफाई और पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही हैं ताकि मवेशी पूरी तरह सुरक्षित रहें।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

