हथकरघा वस्त्रों को बढ़ावा देने से बुनकरों को मिलेगा बाजार, स्वदेशी उत्पादों से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता : मंत्री राकेश सचान
कानपुर, 16 अगस्त (हि.स.)। हथकरघा उद्योग हमारी समृद्ध परंपरा के साथ बड़ी संख्या में बुनकर परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। स्थानीय हथकरघा उत्पादों को अपनाकर और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करके भारतीय वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है। स्वदेशी उत्पादों का अधिकाधिक प्रयोग आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती देगा। यह बातें रविवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हथकरघा वस्त्र फैशन शो में उत्तर प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहीं।
नगर निगम स्थित प्रमिला सभागार में आयोजित फैशन शो का उद्घाटन मंत्री राकेश सचान और महापौर प्रमिला पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में तैयार हथकरघा वस्त्रों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके विपणन और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाना रहा।
फैशन शो में प्रदेश के पुरस्कृत बुनकरों द्वारा तैयार हैंडलूम, खादी और सिल्क के परिधानों को प्रदर्शित किया गया। पारंपरिक बुनाई और आधुनिक डिजाइन के मेल से तैयार परिधानों को पहनकर मॉडलों ने रैंप वॉक किया। संजना वर्मा, प्रज्ञा सिंह, यशविता सिंह, संचिता वर्मा, नैना गुप्ता, श्रृंखला सिंह, रिया श्रीवास्तव, वंशिका सिंह, मुस्कान सिंह, शुभम मिश्रा और तारिक अहमद ने प्रतिभाग किया।
डिजाइनर कुंतानिल दास ने प्रदर्शित परिधानों की डिजाइन, बनावट और उनकी विशेषताओं की जानकारी दी। महापौर प्रमिला पाण्डेय ने कहा कि विदेशी वस्त्रों के आकर्षण से बाहर निकलकर स्वदेशी वस्त्रों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। हथकरघा देश की प्राचीन और गौरवशाली धरोहर है। बुनकरों के उत्पादों को बाजार और समाज का सहयोग मिलने से इस परंपरा को संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कानपुर में हैंडलूम उत्पादों की समृद्ध परंपरा रही है।
कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग पीसी ठाकुर, उप आयुक्त मनोज कान्त गर्ग, खादी ग्रामोद्योग महासंघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता समेत विभागीय अधिकारी, बुनकर, वस्त्र डिजाइनर और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

