हैकाथॉन से वित्तीय प्रणालियों के भविष्य को मिलेगी नई दिशा : शिवसुब्रमण्यम रमन

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हैकाथॉन से वित्तीय प्रणालियों के भविष्य को मिलेगी नई दिशा : शिवसुब्रमण्यम रमन


कानपुर, 24 मार्च (हि.स.)। ऐसे हैकाथॉन सार्वजनिक वित्तीय प्रणालियों के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं और इनसे निकलने वाले समाधान पूरे सिस्टम में सकारात्मक बदलाव का संकेत देते हैं यह बातें मंगलवार को पेंशन फंड विनियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवसुब्रमण्यम रमन ने कहीं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में पेंशन फंड विनियामक एवं विकास प्राधिकरण और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर की संयुक्त पहल ‘इनोवेट4एनपीएस हैकाथॉन 2026’ का समापन हुआ। इस आयोजन ने सार्वजनिक नीति, वित्तीय ढांचे और तकनीकी नवाचार को एक मंच पर लाकर भविष्य की पेंशन व्यवस्था पर गंभीर मंथन का अवसर प्रदान किया।

देश में बढ़ती वृद्ध जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। इसी उद्देश्य से इस हैकाथॉन के माध्यम से नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया, ताकि नेशनल पेंशन सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह आयोजन केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विचारों को व्यवहारिक रूप देने का एक सशक्त मंच भी बना।

कार्यक्रम का मुख्य विषय डिजिटल विश्वास रहा, जिसके तहत यह विचार किया गया कि आने वाले वर्षों में करोड़ों भारतीय किस प्रकार अपनी सेवानिवृत्ति योजनाओं से जुड़ेंगे। चयनित टीमों ने बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत अपने समाधान प्रस्तुत किए। जिनका मूल्यांकन नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विषय विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया गया। इसमें विस्तार क्षमता, नियमों के अनुरूपता, व्यवहारिक वित्त और उपयोगकर्ता विश्वास जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

हैकाथॉन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग और संवाद को भी बढ़ावा मिला। साथ ही अभिव्यक्ति प्रदर्शनी के माध्यम से गहन तकनीक और सार्वजनिक प्रणालियों से जुड़े नवाचारों का प्रदर्शन किया गया, जिसने प्रतिभागियों को नए दृष्टिकोण प्रदान किए।

कार्यक्रम के अंत में चार विजेता टीमों को सम्मानित किया गया, जिनमें आदित्य वीर सिंह और पंकज गोयल, गर्वित जोशी और लक्षित जोशी, अकबर अली की टीम तथा कुलदीप पराशर शामिल रहे। इसके अतिरिक्त शीर्ष 12 फाइनलिस्ट टीमों को भी सराहा गया, जिन्होंने ऑनबोर्डिंग, उपयोगकर्ता सहभागिता, डाटा विश्लेषण और प्रणाली की कार्यक्षमता जैसे विषयों पर प्रभावी कार्य प्रस्तुत किया।

आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार की पहलें यह स्पष्ट करती हैं कि भविष्य में नीतियां केवल सैद्धांतिक नहीं रहेंगी, बल्कि प्रयोग और नवाचार के आधार पर विकसित होंगी। तकनीक का उपयोग आमजन के हित में करते हुए पेंशन व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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