भारत में संविधान के अनुसार पारदर्शी तरीके से कराए जाते हैं चुनाव : ज्ञानेश कुमार

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भारत में संविधान के अनुसार पारदर्शी तरीके से कराए जाते हैं चुनाव : ज्ञानेश कुमार


लखनऊ, 24 अगस्त (हि.स.)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार दो दिवसीए दौरे पर सोमवार को लखनऊ पहुंचे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज के अवध हॉल में छात्रों के साथ संवाद किया। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग की ओर से आयोजित निर्वाचक साक्षरता क्लब और क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस कार्यक्रम मेें उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विद्यार्थी और शिक्षक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र को समृद्ध करने के लिए निर्वाचक साक्षरता क्लब अत्यंत आवश्यक हैं। ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत में निर्वाचन संविधान के अनुसार कड़ाई से कराए जाते हैं और सभी चरणों में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों के समवर्ती परीक्षा के तहत पारदर्शी तरीके से संपन्न कराए जाते हैं। युवा नागरिकों को जोड़ने के महत्व पर बल देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में उनका विश्वास और सजग भागीदारी लोकतंत्र के भविष्य में निवेश है।

उन्होंने कहा कि ईएलसी 2.0 निर्वाचक साक्षरता क्लबों को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्यवस्थित, दृश्यमान और डिजिटल रूप से सक्षम प्लेटफॉर्म के रूप में पुनः तैयार करेगा। इस पहल में युवा नागरिकों के बीच चुनावी साक्षरता और उनके परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों तथा समुदायों में चुनावी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए पूरे वर्ष निरंतर चलने वाली गतिविधियों की परिकल्पना की गई है।

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ईएलसी का उद्देश्य युवा नागरिकों को सजग लोकतांत्रिक भागीदारी का अग्रदूत बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस इकोसिस्टम में लगभग 15 लाख स्कूल हैं, जिनमें करीब 25 करोड़ छात्र और एक करोड़ से अधिक शिक्षक हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 1,500 विश्वविद्यालय और करीब 70,000 शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें अनुमानित तौर पर 4.33 करोड़ छात्र नामांकित हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने छात्रों से किया संवाद

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान ऐतिहासिक कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज के अवध हॉल में छात्रों के साथ प्रेरणादायक संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करने के साथ ही भारतीय लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया, ईवीएम की विश्वसनीयता, फेक न्यूज से सतर्कता और युवा मतदाताओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने भारतीय चुनाव व्यवस्था की विशालता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में करीब 100 करोड़ मतदाता हैं और इतनी बड़ी आबादी के लिए चुनाव कराना अपने आप में एक विशाल कार्य है। उन्होंने बताया कि निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदारी निभाते हैं। भारत निर्वाचन आयोग संविधान, कानून और निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

ईवीएम से संबंधित सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय ईवीएम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा निर्मित की जाती हैं और वे इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई से जुड़ी नहीं होतीं। उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया के दौर में भ्रामक सूचनाओं और फेक न्यूज से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना को स्वीकार करने से पहले उसके स्रोत और सत्यता की जांच करना आवश्यक है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने युवाओं से लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख किया। उन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले विद्यार्थियों से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग के डिजिटल माध्यमों के जरिए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं मतदाता बनें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करें।

संवाद के दौरान छात्रों ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त से चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी विशाल, कॉलेज के प्रधानाचार्य सहित शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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