महामंडलेश्वर 1008 राजेंद्र दास महाराज अविमुक्तेश्वरानंद की चतुरंगिणी सेना में शामिल
महामंडलेश्वर 1008 राजेंद्र दास महाराज चतुरंगिणी सेना में शामिल
हमीरपुर, 24 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में सनातन धर्म की रक्षा और राष्ट्रहित के उद्देश्य से गठित चतुरंगिणी सेना में हमीरपुर और चित्रकूट क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण सामने आया है। परम पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा गठित इस सेना में क्षेत्र के प्रतिष्ठित संत महामंडलेश्वर 1008 राजेंद्र दास जी महाराज को प्रथम चयनित 27 प्रमुख सदस्यों में शामिल किया गया है। यह चयन न केवल उनके व्यक्तिगत तप, त्याग और धर्मसेवा का सम्मान है, बल्कि पूरे हमीरपुर और चित्रकूट क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, चतुरंगिणी सेना का गठन सनातन धर्म की रक्षा, गौ माता के संरक्षण, निर्बलों की सहायता और समाज में धार्मिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से किया गया है। देशभर से चयनित 27 संतों और प्रतिनिधियों के माध्यम से इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना है। महामंडलेश्वर राजेंद्र दास जी महाराज लंबे समय से धर्म सेवा, गौ रक्षा और समाज उत्थान के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनकी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से क्षेत्र के संत समाज और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है। आदि शक्ति गौ रक्षा अखाड़ा से जुड़े संतों और भक्तों ने इस उपलब्धि को संगठन के लिए सम्मानजनक बताते हुए कहा कि इससे गौ रक्षा और धर्म जागरण के कार्यों को नई दिशा और गति मिलेगी। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में चतुरंगिणी सेना का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा, जिससे यह एक सशक्त धार्मिक और सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित हो सके। यह उपलब्धि न केवल महामंडलेश्वर राजेंद्र दास जी महाराज की है, बल्कि समस्त क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा

