सरकारी एजेंसियों के बजाय सीधे किसान-केंद्रित होनी चाहिए तकनीक : राज्यपाल

WhatsApp Channel Join Now
सरकारी एजेंसियों के बजाय सीधे किसान-केंद्रित होनी चाहिए तकनीक : राज्यपाल


कानपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर और जनभवन उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘एआई मंथन 2026’ का शनिवार को शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा और मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन के पहले दिन कृषि, स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर गहन मंथन हुआ। तकनीकी सत्रों में देश के शीर्ष कृषि वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने किसानों की आय बढ़ाने, फसलों के नुकसान को रोकने और सटीक खेती को लेकर कई स्वदेशी एआई मॉडल पेश किए।

राज्यपाल के तीखे सवाल: किसान के नजरिए से बने तकनीक, मिले 'सिंगल विंडो' समाधान

सत्र के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वैज्ञानिकों के समक्ष जमीनी चुनौतियां रखते हुए स्पष्ट किया कि तकनीक सरकारी एजेंसियों के बजाय सीधे किसान-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक ऐसी हो जिससे किसान को यह भरोसा हो कि फसल क्षति का सटीक आकलन होकर उसे वास्तविक मुआवजा मिल रहा है। राज्यपाल ने बीज व कीटनाशक दवाओं की शुद्धता जांच, फसल निगरानी और मौसम की जानकारी के लिए ‘एक ही छत के नीचे’ (सिंगल विंडो) समाधान तैयार करने पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने खेती में बहुतायत में काम कर रहीं महिला व सीमांत किसानों के लिए तकनीक को बेहद किफायती और सुलभ बनाने की अपील की।

आईआईटी रोपड़ का 'कृषि इंटेलिजेंस' मॉडल और 'संकेत' ऐप

तकनीकी सत्र में आईआईटी रोपड़ के एसोसिएट प्रोफेसर व annam.ai के सह-परियोजना निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सैनी ने पूरी तरह स्वदेशी ‘कृषि इंटेलिजेंस’ प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह मॉडल फसलों के नुकसान को 20 से 30 प्रतिशत तक कम कर सकता है। इसका कंप्यूटर विज़न मॉडल मात्र तीन सेकंड में 99.8 प्रतिशत सटीकता के साथ 20 प्रमुख फसलों की पहचान कर लेता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा स्पष्ट फोटो न खींच पाने की समस्या के समाधान के रूप में उन्होंने ‘संकेत’ ऐप का उल्लेख किया, जो फसल के चरण, मौसम और क्षेत्र के आधार पर संभावित कीटों का पहले ही अनुमान लगाकर स्क्रीन पर मिलान के लिए तस्वीर दिखा देता है।

किसान सारथी' से जुड़े 105 संस्थान और 4,800 से अधिक वैज्ञानिक

आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं 'किसान सारथी' के प्रधान अन्वेषक डॉ. संजीव कुमार ने डिजिटल कृषि तंत्र का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 'किसान सारथी' एक त्रि-स्तरीय (L1-कॉल सेंटर/ऐप, L2-700+ केवीके, L3-आईसीएआर संस्थान) पैन-इंडिया डिजिटल परामर्श मंच है, जिसमें 105 संस्थान और 4,819 वैज्ञानिक सीधे जुड़े हैं। यह मंच 'पुल' (हेल्पलाइन, चैटबॉट) और 'पुश' (स्थानीय भाषाओं में स्मार्ट एडवाइजरी) के जरिए किसानों तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही 'किसान सारथी कोष' और भाषिणी व आईएमडी जैसी राष्ट्रीय पहलों के समन्वय से रियल-टाइम जानकारी साझा की जा रही है।

एआई पैटर्न खोजेगा, जीवविज्ञान नहीं बदलेगा: डॉ. द्विजेश चंद्र मिश्रा

आईसीएआर-आईएएसआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. द्विजेश चंद्र मिश्रा ने कृषि बायोइनफॉरमैटिक्स और जीनोमिक्स पर व्याख्यान देते हुए कहा कि 2050 तक 10 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा के लिए एआई और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी अनिवार्य हैं। उन्होंने 'एक्सप्लेनेबल एआई' (ग्लास बॉक्स मॉडल) की वकालत करते हुए कहा कि एआई वैज्ञानिकों का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी है। उन्होंने सूखा व कीट-प्रतिरोधी जीनों की पहचान और फसल ब्रीडिंग चक्र को छोटा करने के लिए अनसुपरवाइज्ड और डीप लर्निंग के उपयोग पर जोर दिया तथा अपनी टीम द्वारा विकसित TSGS और TAGPT जैसे टूल्स का ब्योरा साझा किया।

'एग्रीकल्चर 4.0' में किसान की भूमिका सर्वोपरि: डॉ. अनिल राय

आईसीएआर के पूर्व एडीजी (आईसीटी) डॉ. अनिल राय ने भारतीय कृषि के 'एग्रीकल्चर 4.0' (स्वायत्त व जलवायु-अनुकूल डिजिटल कृषि) में प्रवेश की रूपरेखा रखी। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक सेंसर, आईओटी और ड्रोन तकनीक से संरक्षित खेती की पैदावार 5 गुना तक बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों में डिजिटल कृषि के पाठ्यक्रम शुरू करने और ‘वर्चुअल एकेडमी ऑफ डिजिटल एग्रीकल्चर’ की स्थापना का प्रस्ताव रखा। डॉ. राय ने जोर देकर कहा कि एआई किसानों का विकल्प नहीं बन सकता; अंतिम संदर्भ और व्यावहारिक निर्णय किसान का ही रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Share this story