राज्यपाल ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक में स्टाफ की कमी पर जताई चिंता
लखनऊ, 16 अप्रैल (हि.स.)। प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जन भवन स्थित गांधी सभागार में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। इस दाैरान उन्हाेंने सभी महाविद्यालयों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अनेक महाविद्यालयों में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ की कमी है, कई संस्थानों में छात्र नामांकन अत्यंत कम है, जबकि कुछ महाविद्यालय अत्यंत पुराने होने के बावजूद अपेक्षित छात्र संख्या आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। भवन एवं आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
राज्यपाल ने सुझाव भी दिया कि अध्यापकों के लिए महाविद्यालय के समीप आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ वहीं निवास कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि इस संबंध में उचित नियमावली बनाकर सुनियोजित ढंग से कार्यवाही की जाए, जिससे शिक्षकों की उपलब्धता, समयबद्धता एवं शैक्षणिक वातावरण में निरंतरता सुनिश्चित हो सके।
देश के विकास में तकनीकी दक्षता और कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने वर्तमान समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय आवश्यकताओं एवं विद्यार्थियों की मांग के अनुरूप ही पाठ्यक्रम संचालित करने तथा रोजगारपरक, कौशल आधारित एवं तकनीकी शिक्षा, को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) से संबंधित पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जाय, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे भी अपने संस्थानों के विकास हेतु पूर्व नियोजन, ठोस कार्ययोजना निर्माण एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएँ। प्रत्येक संस्थान को अपने लक्ष्य निर्धारित कर सुनियोजित परियोजनाओं के माध्यम से चरणबद्ध प्रगति सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा संस्थानों की समग्र उन्नति संभव हो सके। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नवाचार, शोध, तकनीक एवं कौशल विकास को प्राथमिकता दें, जिससे वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
राज्यपाल ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि जनभवन की ओर से प्रदान की गई बसों का लाभ अधिकतम रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिलना चाहिए, जिससे उनकी शैक्षणिक भागीदारी एवं नामांकन में वृद्धि हो सके। विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान एवं अनुभव को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाए।
विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष भर आयोजित किए गए कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि विद्यार्थियों को कहाँ-कहाँ ले जाया गया, उन्होंने वहाँ क्या देखा, क्या सीखा तथा उसका उनके ज्ञान पर क्या प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी प्रस्तुत किया जाए कि इन प्रयासों से विद्यार्थियों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई।
राज्यपाल ने यह भी निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय अपने विकास कार्यों के लिए स्पष्ट रूपरेखा तैयार करें, समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें तथा परिणामों का नियमित मूल्यांकन करें, जिससे उन्हें निरंतर आगे बढ़ाया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

