गोरखपुर नगर निगम का बड़ा फैसला: नामांतरण जुर्माना समाप्त, पार्षद निधि बढ़ाई गई

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गोरखपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में बुधवार को शहरवासियों को बड़ी राहत और विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पार्षदों की वरीयता निधि को 55 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी गयी है। बैठक की अध्यक्षता महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने की।

बैठक का सबसे अहम निर्णय खाली जमीन के नामांतरण में देरी पर लगने वाले 10 प्रतिशत वार्षिक जुर्माने को पूरी तरह समाप्त करना रहा। पहले जमीन खरीदने के बाद यदि उस पर निर्माण कार्य नहीं होता था, तो टैक्स निर्धारण के समय जुर्माना देना पड़ता था। इसके अलावा नामांतरण शुल्क के साथ प्रति माह 100 रुपये तक का विलंब शुल्क भी देना होता था। अब नए नियम के तहत केवल रजिस्ट्री के आधार पर निर्धारित नामांतरण शुल्क ही लिया जाएगा। इस फैसले से हजारों ऐसे लोगों को राहत मिलेगी, जिन्होंने जमीन तो खरीदी लेकिन किसी कारणवश निर्माण नहीं करा सके। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए एक विशेष समिति भी गठित की गई है।

नगर निगम ने पार्षदों की वरीयता निधि को 55 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया है। अब पार्षद अपने-अपने वार्डों में अधिक प्रभावी ढंग से विकास कार्य करा सकेंगे। निगम प्रशासन ने पार्षदों को निर्देश दिया है कि वे शीघ्र ही 35-35 लाख रुपये के प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करें, ताकि विकास कार्यों को समय पर शुरू किया जा सके।

गर्मी को देखते हुए नगर निगम ने शहर के 50 भीड़भाड़ वाले स्थानों पर प्याऊ (पेयजल केंद्र) स्थापित करने का निर्णय लिया है। नगर निगम ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए शवदाह वाहन सेवा शुरू करने का भी निर्णय लिया है। आम नागरिकों के लिए इस सेवा का शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है। लावारिस शवों के लिए यह सेवा पूरी तरह नि:शुल्क रहेगी। शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर स्थित पुराने और जर्जर जोनल कार्यालय को ध्वस्त कर वहां आधुनिक भवन बनाने का फैसला लिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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