प्रेम, भक्ति और समर्पण को स्वीकार करते हैं भगवान : विजय कौशल महाराज

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प्रेम, भक्ति और समर्पण को स्वीकार करते हैं भगवान : विजय कौशल महाराज


कानपुर, 27 मार्च (हि.स.)। भगवान किसी के बाहरी रूप, धन या पद को नहीं देखते, वे केवल प्रेम, भक्ति और समर्पण को स्वीकार करते हैं। सच्चा भक्त वही है जो हर परिस्थिति में भगवान पर विश्वास बनाए रखता है और अहंकार से दूर रहकर संत मार्ग पर चलता है। जीवन में धैर्य, संयम और विनम्रता ही व्यक्ति को सही दिशा देती है और उसे ईश्वर के निकट ले जाती है। यह बातें शुक्रवार को विजय कौशल महाराज ने कहीं।

सीएसजेएमयू में श्री हनुमान कथा के षष्ठम दिवस पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के बीच कथा का आयोजन अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। महाराज जी ने अपने ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक प्रवचनों से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया।

कथा के छठवें दिन मुख्य यजमान चरनजीत मेहरा एवं कुंज बिहारी लाल निगम रहे। कार्यक्रम में जुगल किशोर (सेवानिवृत्त आई.पी.एस.), डॉ. सक्षम पाण्डेय तथा उपायुक्त परिवहन आर.आर. सोनी की उपस्थिति रही।

महाराज ने नारद जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि अहंकार मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है और भगवान स्वयं अपने भक्तों के अहंकार को दूर कर उन्हें सही मार्ग पर लाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में अच्छे संस्कार अपनाना, परिवार और समाज में प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

इस दौरान पूज्य महाराज ने राम जन्मोत्सव की कथा भी सुनाई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का आनंद लेते रहे। आयोजन समिति द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं।

अंत में कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ एस. के. पालीवाल, विवि के कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक, वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्या डॉ वंदना पाठक, उपाध्यक्ष अनूप पचौरी, मंत्री उमेश निगम, संयोजक डॉ विवेक द्विवेदी ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य कथा का लाभ लेने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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