घाटमपुर की बीसी सखी रक्षा ने पेश की महिला स्वावलम्बन की मिसाल

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घाटमपुर की बीसी सखी रक्षा ने पेश की महिला स्वावलम्बन की मिसाल


कानपुर, 01 मार्च (हि.स.)। महिला सशक्तिकरण और डिजिटल बैंकिंग के दौर में उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं। घाटमपुर ब्लॉक के छोटे से गांव हथेरूवा की रहने वाली रक्षा तिवारी ने अपनी मेहनत और जज्बे से इस बात को साबित कर दिखाया है। आज रक्षा न केवल अपने गांव बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक कामयाब 'बीसी सखी' (बैंकिंग करेस्पोंडेंट सखी) के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

--मिशन 118 में दिखाया दम, सरकारी योजनाओं का पहुँचाया लाभ

रक्षा तिवारी की कामयाबी की सबसे बड़ी कड़ी सरकार का 'मिशन 118' रहा। इस अभियान के तहत उन्होंने बैंकिंग सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया। उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ काम करते हुए 118 से अधिक जन धन खाते खोले। सिर्फ खाता खोलना ही नहीं, बल्कि उन्होंने ग्रामीणों को भविष्य के प्रति सुरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से भी जोड़ा। उनकी इसी कार्यकुशलता और समर्पण को देखते हुए उन्हें लखनऊ में दो बार सम्मानित किया जा चुका है।

--हर महीने खोल लेती हैं 25 से ज़्यादा खाते

जहाँ आज के दौर में रोजगार एक बड़ी चुनौती है, वहीं रक्षा तिवारी ने बीसी सखी के काम को एक प्रोफेशनल बिजनेस मॉडल बना दिया है। अपनी बेहतर सर्विस और लोगों के भरोसे के दम पर वह आज हर साल एक लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर रही हैं। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्र की किसी भी महिला के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। रक्षा बताती हैं कि बैंकिंग सखी के रूप में ट्रांजेक्शन और अन्य सेवाओं के माध्यम से होने वाली आय ने उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।

--पति का साथ और बच्चों का सुनहरा भविष्य

रक्षा की इस सफलता के पीछे उनके पति का निरंतर सहयोग रहा है। परिवार के समर्थन ने उनके हौसलों को टूटने नहीं दिया। आज अपनी इसी कमाई के दम पर वह अपने दोनों बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दिला पा रही हैं। उनकी बेटी समृद्धि तिवारी कक्षा 6 में और बेटा प्रभात तिवारी कक्षा 5 में पढ़ रहा है। रक्षा का कहना है कि सरकार की इस योजना ने मुझे न केवल आर्थिक आजादी दी, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक पहचान भी दिलाई है।

--गांव वालों के लिए बनीं 'चलता-फिरता बैंक'

घाटमपुर के लोगों के लिए अब बैंक जाना मजबूरी नहीं रहा। बुजुर्गों की पेंशन हो या किसानों की सम्मान निधि, रक्षा तिवारी घर-घर जाकर बैंकिंग सुविधाएं मुहैया करा रही हैं। उनकी कहानी आज ब्लॉक की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है कि कैसे एक छोटे से गांव से निकलकर भी आसमान छूआ जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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