जी राम जी विधेयक करेगा विकसित भारत के सपनों को साकार : योगेंद्र उपाध्याय

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जी राम जी विधेयक करेगा विकसित भारत के सपनों को साकार : योगेंद्र उपाध्याय


फिरोजाबाद, 12 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को कहा कि मनरेगा योजना का केवल नाम ही नहीं बदला गया बल्कि इस योजना का नाम बदलने के साथ ही कई बड़े बदलाव भी किए गए हैं, पारदर्शिता की गई है। जिनका लाभ आगामी समय में इससे जुड़े लोगों को मिलेगा। विपक्ष का काम केवल राजनैतिक रूप से केन्द्र व प्रदेश सरकार की हर जनहितकारी योजना का विरोध करना है।

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय सोमवार को फिरोजाबाद में ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन ग्रामीण (जी राम जी) के लिये जनजागरण अभियान के तहत पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा आज जब भारत एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीबी उन्मूलन, आधारभूत सुविधाओं के सार्वभौमिक कवरेज, डिजीलीकरण सशक्तीकरण में बेमिसाल प्रगति की है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की केन्द्र सरकार ने राज्यों से निरन्तर संवाद कर जमीनी अनुभवों के आधार पर ग्रामीण विकास को मात्र राहत आधारित सोच से निकालकर विकास की मॉडल में बदलने की प्रक्रिया की हैः विकसित भारत-जी-राम जी।

यह नया कानून (विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार गारण्टी एक्ट-2025) ऐसी ही राष्ट्रीय सोच का एक साकार और वैधानिक उत्तर है। यह कानून केवल रोजगार की गारण्टी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, उत्पादक और विकास की ओर ले जाने का एक माध्यम है। मनरेगा का अर्थ ग्रामीण क्षेत्रों में गड्डे खोदने और भरने तक सीमित रह गया था और जिस कारण यह भी प्रकाश में आया कि विगत वर्षों में इसमें (मनरेगा) सैकड़ों करोड़ का घोटाला हुआ है। इसलिए आवश्यकता मात्र सुधार की नहीं बल्कि ऐसे नये वैधानिक ढांचे की थी, जो न सिर्फ ग्रामीण परिवारों को रोजगार की वैधानिक गारण्टी दे, बल्कि विकास और ग्रामीण क्षेत्र के स्थायी क्षमता का निर्माण भी कर सके। इस दृष्टि से विकसित भारत जी-राम जी विधेयक 2025 का प्रख्यापन हुआ है।

मनरेगा में जहां 100 दिन रोजगार का प्रावधान था, वहीं वी०बी०-जी-राम-जी में 125 दिन रोजगार की गारण्टी है। मनरेगा राहत आधारित, बिखरी और विविध (निश्चित नहीं) प्रकार के कार्यों हेतु सीमित निर्माण रणनीति और ग्राम पंचायत तक ही सीमित था। जबकि वी०बी०-जी राम जी विकास और सशक्तीकरण पर आधारित है तथा चार राष्ट्रीय प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से सुनिश्चित हैं। इसमें टिकाऊ, उत्पादक, अवसंरचना, विकसित ग्राम पंचायत जैसी रणनीति पर आधारित निर्माण कार्य है। मनरेगा में मैनुअल और आंशिक निगरानी थी, जिस कारण शुचिता और पारदर्शिता का आभाव था जबकि वी०बी०-जी राम जी में ए०आई०, रियल टाइम डैशबोर्ड और सोशल आडिट के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था है जो पारदर्शी है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और आकस्मिक परिस्थितियों में यह उनका सुरक्षा कवच भी बनेगा। यह कानून ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और समृद्ध बनायेगा और विकसित भारत के सपनों को साकार करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / कौशल राठौड़

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