भविष्य की जरूरत केवल डिग्री नहीं, विजन और कौशल से मिलेगी सफलता : कुलपति प्रो. रुम्की बनर्जी

WhatsApp Channel Join Now
भविष्य की जरूरत केवल डिग्री नहीं, विजन और कौशल से मिलेगी सफलता : कुलपति प्रो. रुम्की बनर्जी


भविष्य की जरूरत केवल डिग्री नहीं, विजन और कौशल से मिलेगी सफलता : कुलपति प्रो. रुम्की बनर्जी


जौनपुर,29 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली में उभरते मुद्दे एवं चुनौतियां विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को आर्यभट्ट सभागार में हुआ। इस दौरान प्रबंधन, नेतृत्व, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कौशल विकास जैसे समकालीन विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर अकादमिक विमर्श को समृद्ध किया।

समापन सत्र में केके विश्वविद्यालय, नालंदा की प्रति कुलपति प्रो. रुम्की बनर्जी ने कहा कि आज का वैश्विक कॉर्पोरेट जगत ‘डिग्री-फर्स्ट’ से आगे बढ़कर ‘स्किल-फर्स्ट इकोनॉमी’ की ओर अग्रसर है, जहाँ व्यावहारिक कौशल और विजन को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बावजूद जटिल समस्याओं के समाधान के लिए मानवीय संवेदना और रचनात्मक सोच अनिवार्य है।

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. कुशेन्द्र मिश्रा ने कहा कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल विकास आवश्यक है। उन्होंने बेरोजगारी की समस्या को कौशल की कमी से जोड़ते हुए व्यावहारिक ज्ञान पर बल दिया।

“नेतृत्व एवं सुशासन” विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. पी.सी. पतंजलि ने की। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति उसके प्रभावी नेतृत्व और सुशासन पर निर्भर करती है। प्रो. एच.सी. पुरोहित ने विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में मजबूत नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित किया। इस सत्र में बी.एल. आर्य विशिष्ट अतिथि रहे तथा प्रो. प्रदीप कुमार सह-अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।

दूसरे तकनीकी सत्र में “कार्य और बाजार का भविष्य: मानव संसाधन प्रबंधन, कृषि-व्यवसाय, ई-वाणिज्य एवं व्यावसायिक अर्थशास्त्र का समन्वय” विषय पर चर्चा हुई। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अजय वाघ ने की। उन्होंने बदलते कार्यपरिवेश और मानव संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं प्रो. अमित सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कॉर्पोरेट चुनौतियों के समाधान का आधार बताया।

संगोष्ठी के अंतर्गत “डिग्री बनाम कौशल,प्रतिभा की दौड़ में कौन जीतेगा” विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. वी.के. सिंह ने की।

अंत में संयोजक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन सचिव डॉ. आशुतोष सिंह ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। सत्रों का संचालन डॉ. रसिकेश एवं डॉ. सुशील कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. मुराद अली, प्रो. एस के सिन्हा, डॉ. अमित वत्स, डॉ. अन्नू त्यागी समेत विभिन्न भागों से आये प्रतिभागी उपस्थित रहे।----------

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

Share this story