दशकों से राजनीति करने वाले पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने लिया सन्यास

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दशकों से राजनीति करने वाले पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने लिया सन्यास


--बादशाह सिंह ने राजनीति छोड़ने को इंटरनेट में वीडियो किया वायरल

हमीरपुर, 11 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में पिछले चार दशक तक यूपी के साथ एमपी के राजनीति में दखल रखने वाले राजनीति के दिग्गज नेता कुंवर बादशाह सिंह ने सोशल मीडिया में करीब 10 मिनट का वीडियो वायरल करके सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की है।

वायरल वीडियो में उन्होंने राजनीतिक सफर कांग्रेस के यूथ अध्यक्ष से शुरू करने की बात कहते हुए कहा कि हमीरपुर जिले की खरेला नगर पंचायत का अध्यक्ष बनने के साथ उन्होंने जिले की मौदहा विधानसभा सीट से पहली बार 1991 में विधानसभा का चुनाव लड़कर जीता। इस सीट से वह 2007 की आखिरी विधायक बने। इसके बाद इस सीट का अस्तित्व ही खत्म हो गया। भाजपा से तीन बार तथा बसपा से आखिरी बार यह मौदहा से विधायक रहे और 2007 में प्रदेश में बसपा की सरकार पर इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाकर श्रम विभाग दिया गया। वर्तमान में सपा में सक्रिय थे और टिकट के प्रबल दावेदार थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया ने उनको बड़ी जिम्मेदारी सौंपी और कहा कि हमीरपुर के लोकसभा सीट जिताओ। उन्हें 2027 में विधान सभा में मौका दिया जाएगा।

इन्होंने लोकसभा चुनाव में हमीरपुर विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी को जीतने के लिए रात दिन मेहनत की और उसी का परिणाम रहा कि लोकसभा की तीन विधानसभा सीटों में भाजपा से हारने के बाद सपा प्रत्याशी ने हमीरपुर सदर विधानसभा सीट में आकर भाजपा प्रत्याशी को हराकर लोकसभा सीट पर कब्जा जमा लिया। हमीरपुर महोबा तिंदवारी लोकसभा सीट पर हमीरपुर सदर, राठ सुरक्षित, चरखारी, महोबा के साथ बांदा जनपद की तिंदवारी विधानसभा सीट आती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पुष्पेंद्र सिंह चंदेल तथा सपा ने अजेंद्र सिंह लोधी को मैदान में उतारा था। अजेंद्र सिंह लोधी ने पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को चरखारी विधानसभा सीट में 2000 मतों से पीछे किया था। लोधी इसी विधानसभा सीट के निवासी हैं। भाजपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह ने अपनी विधानसभा सीट महोबा में सपा को 11000 से अधिक मतों से हराया। राठ सुरक्षित लोधी बाहुल्य होने के बाद भाजपा के पुष्पेंद्र सिंह चंदेल 1800 से अधिक मतों से सपा प्रत्याशी को हराया।

इसी तरह तिंदवारी विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी ने सपा प्रत्याशी को 7000 से अधिक मतों से हराया। लेकिन जब हमीरपुर सदर में दोनों के मध्य मुकाबला हुआ, तो सपा के अजेंद्र सिंह लोधी ने तीनों विधानसभा सीटों के मतों की भरपाई करके भाजपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को 2600 से अधिक मतों से हराकर लोकसभा सीट जीत ली। इसके पीछे कुंवर बादशाह सिंह की कड़ी मेहनत थी। जिससे सपा की राह आसान हुई और सपा नेतृत्व हारी हुई सीट जीतकर बेहद खुश हुआ। इस परिणाम के बाद बादशाह सिंह का सदर विधान सीट से चुनाव लड़ना करीब तय माना जा रहा था और वह प्रबल दावेदार भी थे। लेकिन अचानक उन्होंने सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल करके सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा करके सबको चौंका दिया है।

बादशाह का राजनीतिक सफर कांग्रेस के यूथ अध्यक्ष से शुरू हुआ। इसके बाद में कांग्रेस सेवा दल के जिले के पदाधिकारी रहते हुए 1989 में उन्होंने नगर पंचायत खरेला में अध्यक्ष पद का चुनाव लडकर जीते। 1991 में वह भाजपा के टिकट पर मौदहा से विधायक बने। 1993 में वह बसपा के बशीरुद्दीन से बहुत कम मतों से हारे। इसके बाद उन्होंने इसी सीट से 1996 एवं 2002 में भाजपा से विधायक बने। 2007 में वह बसपा से इसी सीट से चुनाव लड़े और चौथी बार जीत कर मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 2012 के चुनाव में मौदहा सीट का अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके बाद वह कांग्रेस में चले गए। बाद में सपा में शामिल होकर सक्रिय थे। उन्होंने अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए 1990 में इंसाफ सेना बनाई और बुंदेलखंड में विस्तार करके अलग राज्य बनाने की आवाज बुलंद की।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा

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