वन संरक्षण से ही पर्यावरण संतुलन और आर्थिक विकास संभव : डॉ. आर.के. दीक्षित

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वन संरक्षण से ही पर्यावरण संतुलन और आर्थिक विकास संभव : डॉ. आर.के. दीक्षित


कानपुर, 21 मार्च (हि.स.)। वनों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। जलवायु परिवर्तन और घटती जैव विविधता के इस दौर में वनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वन संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।” यह बातें विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. दीक्षित ने कहीं।

चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की गोल्डेन जुबली श्रृंखला के अंतर्गत “वन एवं आर्थिक विकास” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कृषि एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार के नेतृत्व में हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और आमजन के बीच वनों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत पर्यावरणीय प्रथाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. दीक्षित ने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में वनों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए वन प्रबंधन में समन्वित दृष्टिकोण अपनाने और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया। वहीं विशिष्ट अतिथि यू.सी. भट्ट ने अपने अनुभव साझा करते हुए वन संरक्षण में जनसहभागिता और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को आवश्यक बताया।

डॉ. मुनीश कुमार ने वानिकी के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान क्विज, स्पीच और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन कर विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन वनों के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ऋचा शर्मा द्वारा किया गया। इस सत्र में अनेक संकाय सदस्य जैसे डॉ. रामजी गुप्ता, डॉ. सर्वेश कुमार डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. रजत मिश्रा, डॉ. अनुराग कुमार सिंह, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. सुमित राज, डॉ शक्ति सिंह, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. योगेश कुमार उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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