राहत कार्यों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए : प्रमुख सचिव राजस्व
— बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तहसीलवार एवं ग्रामवार माइक्रो प्लान तैयार किया जाए : राहत आयुक्त
लखनऊ, 02 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश में संभावित बाढ़ की स्थिति के मदृेनजर गुरूवार को दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में बाढ़ प्रबंधन से संबंधित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, गृह मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रमुख सचिव, राजस्व अपर्णा यू. ने की। सचिव, राजस्व एवं राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव अपर्णा यू. ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक के जीवन एवं सुरक्षा की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान प्रभावित व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक राहत शिविर में सम्मानजनक एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि संसाधनों का केवल आवंटन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी वास्तविक उपलब्धता, उपयोगिता तथा आवश्यकता के अनुरूप विश्लेषण करते हुए पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित करते हुए प्रत्येक परिस्थति में जनसामन्य को उचित सुविधाएं तथा सहयोग उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल सहित उपलब्ध तकनीकी प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करते हुए समन्वित योजना बनाने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत कार्यों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे बाढ़ प्रबंधन को केवल प्रशासनिक दायित्व न मानकर जनसेवा का महत्वपूर्ण अवसर समझें तथा समयबद्ध, समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्यवाही सुनिश्चित करें, जिससे संभावित बाढ़ से जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सचिव, राजस्व एवं राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी जनपद निर्धारित समय-सीमा में अपनी तैयारियां पूर्ण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारी नियमित रूप से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठकें आयोजित करें तथा बाढ़ तैयारियों की सतत समीक्षा करें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तहसीलवार एवं ग्रामवार माइक्रो प्लान तैयार किया जाए, जिसमें प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं उपलब्ध संसाधनों का स्पष्ट विवरण अंकित हो।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बाढ़ संभावित जनपद में माॅडल फ्लड शेल्टर विकसित किए जाएं, जहां स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रकाश, चिकित्सा, महिला एवं पुरूषों के लिए पृथक व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। प्रत्येक जनपद बाढ़ से संबंधित उपकरणों एवं मशीनरी का विस्तृत विवरण अद्यतन रखे तथा उनकी कार्यशीलता का नियमित परीक्षण सुनिश्चित करें।
ग्राम पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं स्थानीय समुदायों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बाढ़ के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया जाए।
राहत आयुक्त ने कहा कि बाढ़ के दौरान बड़े पैमाने पर विद्युत आपूर्ति बाधित होने की संभावना रहती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सभी जनपदों में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे राहत शिविरों, नियंत्रण कक्षों एवं आवश्यक सेवाओं का संचालन निर्बाध रूप से जारी रह सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

