इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पांच पुराछात्र “पांडुलिपि मित्र” नियुक्त

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पांच पुराछात्र “पांडुलिपि मित्र” नियुक्त


-पाण्डुलिपि धरोहर में भारत विश्व का सबसे समृद्ध धनी देश: प्रो.आलोक

प्रयागराज, 09 जून (हि.स)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच पुराछात्रों को बतौर “पांडुलिपि मित्र” नियुक्त किया गया है।

विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक प्रसाद ने बताया कि विगत सत्र के परास्नातक छात्रों अनुराग यादव, वैभव सोनी, विक्की कुमार, आशीष कुमार पटेल और अमृता सिंह का चयन भारत सरकार की पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण की महत्वाकांक्षी योजना “ज्ञान भारतम मिशन” के अंतर्गत “राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण कार्य” में “पांडुलिपि मित्र” के रूप में हुआ है।

उन्होंने बताया कि अनुराग यादव को बस्ती जनपद, वैभव सोनी को जौनपुर जनपद, आशीष पटेल को प्रयागराज जनपद, विक्की को आजमगढ़ तथा अमृता सिंह को मिर्जापुर जनपद आवंटित किया गया। ज्ञान भारत मिशन के अंतर्गत संचालित यह अल्पावधि पांडुलिपि मित्र कार्यक्रम चयनित विद्यार्थियों को जनपद स्तर पर कार्य करते हुए पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, सूचीकरण एवं प्रलेखन का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगा।

चयन से पहले लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार में पांडुलिपि अभिरुचि कार्यशाला और प्रशिक्षण शिविर आयोजित की गई, जिसमें 300 से अधिक परास्नातक छात्रों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को भारतीय पांडुलिपि परम्परा, उनके संरक्षण, संवर्धन, सर्वेक्षण एवं प्रलेखन सम्बंधित विषयों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही पांडुलिपियों की पहचान, उनके महत्व तथा संरक्षण की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। इस शिविर के समापन पर प्रतिभागियों की योग्यता एवं समझ के मूल्यांकन हेतु 50 प्रश्नों की परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा के परिणाम के आधार पर पांडुलिपि मित्रों का चयन किया गया है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. आलोक प्रसाद के अनुसार पाण्डुलिपि धरोहर में भारत विश्व का सबसे समृद्ध धनी देश है। केंद्र सरकार की परियोजना राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सर्वे में देश की अनुमानित एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियां हैं। ये पाण्डुलिपियाँ केवल धार्मिक या साहित्यिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि इतिहास, दर्शन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा, ज्योतिष, कला की अमूल्य धरोहर भी हैं। इन पाण्डुलिपियों में भारतीय सभ्यता के हजारों वर्षों के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का साक्ष्य सुरक्षित है, जिनका संरक्षण और अध्ययन वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इविवि की पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि इस मिशन के अंतर्गत संचालित पाण्डुलिपि मित्र कार्यक्रम युवाओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को भारत की इस विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह कार्यक्रम केवल पाण्डुलिपियों की खोज और संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में अपनी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर के प्रति जागरूकता विकसित करने का भी माध्यम है। वस्तुतः ज्ञान भारतम् मिशन और पाण्डुलिपि मित्र कार्यक्रम भारत की प्राचीन ज्ञान-परम्परा को सुरक्षित रखते हुए उसे डिजिटल माध्यमों के द्वारा व्यापक समाज और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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