किण्वित जैविक खाद के प्रयोग से सुधरेगी मिट्टी की उर्वरता : डॉ. खलील खान
कानपुर, 23 जून (हि.स.)। किण्वित जैविक खाद के नियमित प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है, उसकी जल धारण क्षमता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार आता है। किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। यह बाते मंगलवार कों कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर के मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, दिलीप नगर द्वारा किण्वित जैविक खाद (एफओएम) योजना के तहत विकासखंड मैथा के ग्राम गणेशपुर में किसानों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की उर्वरता एवं फसलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए किण्वित जैविक खाद के उपयोग के लाभ बताए गए।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि यह खाद बायोगैस संयंत्रों से प्राप्त उपोत्पाद है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में सहायक है। उन्होंने कहा कि इसके प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है तथा जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है। साथ ही किसानों को अंधाधुंध यूरिया और डीएपी के उपयोग से बचने तथा प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
उन्होंने बताया कि किण्वित जैविक खाद के नियमित उपयोग से फसल उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है। यह खाद रसायनों से मुक्त होने के कारण भूमि प्रदूषण को भी कम करती है।
कार्यक्रम में पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत ने पशु प्रबंधन एवं दुग्ध उत्पादन संबंधी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को खेतों में गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद के प्रयोग पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर अमर सिंह, रमेश चंद्र, पुष्पेंद्र कुमार, अमरेश कुमार, राम स्वरूप सहित 60 से अधिक किसान उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

