ऊसर भूमि में धान की बेहतर पैदावार के लिए वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं किसान : डॉ. खलील खान

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ऊसर भूमि में धान की बेहतर पैदावार के लिए वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं किसान : डॉ. खलील खान


कानपुर, 25 अगस्त (हि.स.)। ऊसर भूमि में धान की खेती के दौरान जलवायु के अनुकूल तकनीकों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और एकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाकर किसान उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं। धान की उन्नत किस्मों के साथ जल-बचत वाली तकनीकों का प्रयोग खेती की लागत कम करने में भी सहायक है। यह बातें मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर के वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने निकरा योजना की एससीएसपी उपयोजना के तहत आयोजित दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण के दौरान कहीं।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर की ओर से विकासखंड मैथा के रूदापुर गांव में ऊसर भूमि में धान फसल प्रबंधन विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में किसानों को धान की खेती से जुड़ी वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जलवायु अनुकूल उन्नत तकनीकों, बेहतर पैदावार और कीट प्रबंधन के उपाय बताए गए। वैज्ञानिकों ने उन्नत उर्वरक प्रबंधन के साथ वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर जोर दिया।

किसानों को जलवायु-सहिष्णु और अधिक उत्पादन देने वाली धान की किस्मों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही धान की सीधी बुवाई और पानी की बचत करने वाली तकनीकों के बारे में बताया गया। पोषण प्रबंधन में उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल तथा खेती की लागत को कम करने के उपाय भी समझाए गए।

प्रशिक्षण में फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन की जानकारी दी गई। किसानों को फसल की शुरुआती अवस्था में रोगों की पहचान करने और समय रहते नियंत्रण के उपाय अपनाने के बारे में भी बताया गया।

कार्यक्रम में गांव के 50 से अधिक महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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