मिलेट्स उत्पादन बढ़ाकर किसान बढ़ा सकते हैं आय : सांसद

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मिलेट्स उत्पादन बढ़ाकर किसान बढ़ा सकते हैं आय : सांसद


कानपुर, 22 सितंबर (हि.स.)। मिलेट्स यानी श्रीअन्न की बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों को इसका उत्पादन बढ़ाने के साथ प्रसंस्करण पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। श्रीअन्न को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने से इसके निर्यात को भी बढ़ावा मिला है। यह बातें मंगलवार को सांसद रमेश अवस्थी ने कैलाश भवन सभागार में आयोजित मिलेट्स महोत्सव में किसानों को संबोधित करते हुए कहीं।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत जनपद स्तरीय मिलेट्स महोत्सव और उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार योजना के तहत मिलेट्स रेसिपी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी ने की। कृषि विभाग की ओर से बीज, कृषि रक्षा, मृदा परीक्षण, उद्यान, एफपीओ और जैविक खेती समेत विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने स्टॉलों का निरीक्षण किया और कृषि विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी लेने के साथ कृषि संबंधी साहित्य भी प्राप्त किया।

सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकता किसानों, युवाओं, मातृशक्ति और गरीबों की प्रगति है। भविष्य में मिलेट्स की मांग और बढ़ने की संभावना है, इसलिए किसान ज्वार, बाजरा, रागी समेत श्रीअन्न की फसलों का अधिक उत्पादन करें। उन्होंने कहा कि देश की समृद्धि में सभी की भागीदारी जरूरी है।

विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के साथ तिलहन, दलहन और श्रीअन्न पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। मिलेट्स पोषण से भरपूर हैं और किसानों को पोषक फसलों का उत्पादन बढ़ाना चाहिए। उन्होंने ‘खेत से ही स्वास्थ्य’ की भावना के अनुरूप पोषणयुक्त भोजन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि कम लागत में मिलेट्स उत्पादन से किसान बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। मिलेट्स के तीन प्रमुख पक्ष किसान, पोषण और व्यापार हैं। प्रसंस्करण और उचित विपणन के माध्यम से किसान अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं। उन्होंने किसानों की समस्याओं के समाधान में जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

संयुक्त कृषि निदेशक धर्मेंद्र कुमार ने संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग और प्रतिबंधित कृषि रक्षा रसायनों से बचने की सलाह दी। उन्होंने जैविक एवं सुरक्षित कृषि पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया। बताया कि विश्वविद्यालय में मिलेट्स प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है, जहां किसान अपनी उपज का प्रसंस्करण करा सकते हैं।

उप कृषि निदेशक डॉ. आरएस वर्मा ने कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिकों डॉ. अखिलेश मिश्रा, डॉ. रामजी गुप्ता, डॉ. सीमा सोनकर, डॉ. वीके त्रिपाठी, डॉ. साधना बैश, डॉ. विनोद प्रकाश और डॉ. महक सिंह ने किसानों को मिलेट्स व दलहन की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी और उनकी समस्याओं का समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन शिव आसरे पाण्डेय ने किया। इस दौरान कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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