खेत तालाब योजना से ललिता ने बुनी समृद्धि की नई कहानी, मछली पालन से लाखों का मुनाफा

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खेत तालाब योजना से ललिता ने बुनी समृद्धि की नई कहानी, मछली पालन से लाखों का मुनाफा


-ललिता शर्मा ने अपने मॉडल फार्म के जरिए गाँव के 10 लोगों को दिया नियमित काम, बनीं क्षेत्र की रोल मॉडल-खेत तालाब योजना के तहत बनवाया तालाब, मछली पालन से लाखों की कमाई -50 बीघा में पारंपरिक फसलों के साथ उन्नत बागवानी, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से हर साल 04 लाख की आय

कानपुर, 07 अप्रैल (हि.स.)। ललिता शर्मा ने विभाग की योजनाओं का जिस तरह से क्रियान्वयन किया है, वह सराहनीय है। विशेषकर खेत तालाब योजना के माध्यम से उन्होंने जल संचयन के साथ-साथ मछली पालन को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है। योगी सरकार की मंशा के अनुरूप हमारा विभाग हर पात्र किसान तक ऐसी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। ललिता जैसे प्रगतिशील किसान अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणा हैं। यह बातें मंगलवार को भूमि संरक्षण अधिकारी आरपी कुशवाहा ने कही।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को घाटमपुर की ललिता शर्मा ने जमीन पर सच कर दिखाया है। मुख्यमंत्री 'खेत तालाब योजना' को अपनी सफलता का आधार बनाते हुए ललिता ने न केवल जल संरक्षण की मिसाल पेश की, बल्कि खेती को एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदल दिया है। खेत तालाब योजना का लाभ लेकर बेहतर काम करने के लिए ललिता शर्मा को उपमुख्यमंत्री की ओर से सम्मान भी मिला है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मॉडल फार्म की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया।

मछली पालन से लाखों की कमाई

ललिता की सफलता में सबसे अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने योगी सरकार की 'खेत तालाब योजना' का लाभ उठाया। उन्होंने अपने खेत में तालाब बनवाया। इस तालाब में वह मछली पालन कर रही हैं, जिससे उन्हें सालाना दो लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। मछली पालन के पूरे सीजन में लागत के तौर पर छह लाख रुपये के आसपास लग जाते हैं।

मॉडल फार्म ने बदली तकदीर

ललिता शर्मा ने अपनी 50 बीघा जमीन पर सिर्फ एक फसल उगाने के बजाय एक 'मॉडल फार्म' तैयार किया है। यहाँ वह धान, गेहूं, चना, मटर और सरसों जैसी पारंपरिक फसलें तो उगाती ही हैं, साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती भी करती हैं। टमाटर, बैंगन और लौकी की व्यावसायिक बागवानी ने उनकी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। ललिता शर्मा कहती हैं, अगर किसान केवल एक फसल पर निर्भर रहेगा, तो जोखिम ज्यादा है। मैंने मिश्रित खेती अपनाई, जिससे मुझे पूरे साल कमाई होती रहती है।

ललिता शर्मा पिछले कई साल से पशुपालन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके पास 50 बकरी, चार गाय और दो भैंसें हैं। वह पारंपरिक तरीके के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन करती हैं। यही कारण है कि दुग्ध उत्पादन से सालाना करीब चार लाख रुपये की बचत होती है। उन्होंने हाल ही में बकरी पालन का प्रशिक्षण भी लिया है।

10 लोगों को दिया रोजगार

ललिता शर्मा की कहानी सिर्फ उनकी अपनी कामयाबी तक सीमित नहीं है। वह अब दूसरों के लिए भी मददगार बन रही हैं। उनके विशाल मॉडल फार्म और डेयरी यूनिट में काम करने के लिए गाँव के ही 10 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इस तरह वह न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि उन्होंने दूसरे परिवारों को भी सहारा दिया है।

अपनी सफलता का श्रेय मेहनत के साथ-साथ सरकार की योजनाओं और विभाग के सहयोग को देते हुए ललिता शर्मा ने कहा कि योगी सरकार की नीतियां किसानों को आगे बढ़ाने वाली हैं। खेत तालाब योजना और उद्यान विभाग के अधिकारियों के सही मार्गदर्शन और तकनीकी परामर्श की वजह से ही मैं यह मुकाम हासिल कर पाई हूँ। मैं चाहती हूँ कि गांव की अन्य महिलाएं भी सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं और सशक्त बनें।

क्या है 'खेत तालाब योजना'?

योगी सरकार द्वारा संचालित इस योजना के तहत किसान अपने खेत के एक हिस्से में तालाब का निर्माण कराते हैं। तालाब निर्माण की कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसान के खाते में अनुदान के रूप में दिया जाता है। तालाब बनने से किसान को सिंचाई के लिए मुफ्त पानी तो मिलता ही है, साथ ही वह इसमें मछली पालन और तालाब के किनारों पर सब्जियां उगाकर अपनी कमाई को दोगुना कर सकता है। कोई भी कृषक या कृषक समूह इसके लिए विभागीय वेबसाइट या कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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