खेत-तालाब योजना से किसानों की बढ़ रही आय : आर.पी. कुशवाहा

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खेत-तालाब योजना से किसानों की बढ़ रही आय : आर.पी. कुशवाहा


कानपुर, 18 मार्च (हि.स.)। खेत-तालाब योजना किसानों के लिए सिंचाई के साथ-साथ आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन रही है। इससे किसान अब बारिश पर निर्भर नहीं रह गए हैं और उन्हें सालभर पानी की उपलब्धता के साथ अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। योजना के जरिए किसान मछली पालन और मोती खेती जैसे नए प्रयोग भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। यह बातें बुधवार को भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने कहीं।

कानपुर नगर के ग्रामीण इलाकों में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। योगी सरकार की खेत-तालाब योजना के तहत भितरगांव, घाटमपुर, सरसौल, ककवन, चौबेपुर और पतारा ब्लॉकों में किसानों ने अपने खेतों में तालाब बनवाए हैं। बीते एक वर्ष में करीब 14 खेत-तालाब तैयार हुए हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है।

तालाब बनने से किसानों की बारिश पर निर्भरता कम हुई है और खेत में ही पानी उपलब्ध होने से अब दो से तीन फसलें लेना आसान हो गया है। इससे उत्पादन के साथ-साथ आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

योजना का लाभ लेने वालों में भितरगांव के दयाशंकर व अंशुल सचान, घाटमपुर के देव नारायण, मनोज, जगदेव व अशफाक अली, सरसौल के वीरेंद्र बहादुर सिंह व रामजीवन कुशवाहा, ककवन के सुरेश, चौबेपुर की अनु आभास तथा पतारा के गजराज व मथुरा प्रसाद सचान शामिल हैं। इन किसानों ने तालाब के सहारे खेती के साथ अन्य गतिविधियां भी शुरू की हैं।

घाटमपुर के किसान मनोज के अनुसार पहले सिंचाई में काफी दिक्कत होती थी, लेकिन तालाब बनने के बाद फसल समय पर तैयार होने लगी है और लागत भी घटी है। वहीं रामजीवन कुशवाहा ने तालाब में मछली पालन शुरू कर अतिरिक्त आय का जरिया बनाया है।

खेत-तालाब अब केवल पानी का स्रोत नहीं रह गया है। कई किसान इसमें मछली पालन और मोती की खेती कर रहे हैं, जिससे सालभर आय सुनिश्चित हो रही है। गांवों में खेती के साथ छोटे स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

योजना के तहत लगभग 22×20×3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है, जिसकी लागत करीब 1.05 लाख रुपये है। इसमें किसानों को 50 प्रतिशत यानी 52,500 रुपये तक का अनुदान दो किस्तों में सीधे खाते में दिया जाता है। इसके अलावा वॉटर लिफ्टिंग डिवाइस और सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम पर भी सहायता मिल रही है।

गांवों में अब खेती को लेकर सोच बदल रही है और किसान आधुनिक तरीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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