जरूरतमंद परिवारों की पहचान आसान करेगा ‘फैमिली स्कोर’: प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल

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जरूरतमंद परिवारों की पहचान आसान करेगा ‘फैमिली स्कोर’: प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल


कानपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। फैमिली स्कोर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपलब्ध सरकारी आंकड़ों की मदद से परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का बेहतर निर्धारण कर सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगा। यह बातें मंगलवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहीं।

आईआईटी कानपुर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘फैमिली स्कोर’ प्रणाली विकसित की है। इसके जरिए सरकारी रिकॉर्ड में पहले से मौजूद आंकड़ों के आधार पर परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन किया जा सकता है। इससे जरूरतमंद परिवारों की पहचान के लिए बड़े पैमाने पर घर-घर सर्वेक्षण कराने की जरूरत कम हो सकती है।

आईआईटी कानपुर और आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से परियोजना के पहले चरण में यह जांच की गई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से पारंपरिक घरेलू सर्वेक्षण के बिना परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का भरोसेमंद आकलन किया जा सकता है या नहीं। शुरुआती नतीजों में आईआईटी कानपुर के कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल के समूह ने पारंपरिक सर्वेक्षण की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

‘फैमिली स्कोर’ के लिए करीब 15 सरकारी आंकड़ा समूहों का इस्तेमाल किया गया है। इनमें परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े अलग-अलग संकेतक शामिल हैं। मॉडल को राज्यव्यापी सर्वेक्षण से तैयार सामाजिक एवं आर्थिक स्कोर के आधार पर प्रशिक्षित और जांचा गया है। मॉडल तैयार होने के बाद उपलब्ध सरकारी आंकड़ों वाले परिवारों का नया सर्वेक्षण कराए बिना उनका स्कोर तैयार किया जा सकता है।

आईआईटी कानपुर के प्रतिनिधियों ने पहले चरण के नतीजे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए। टीम में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स के डीन प्रो. नितिन सक्सेना और एयरावत रिसर्च फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष श्रीवास्तव शामिल रहे।

प्रो. नितिन सक्सेना ने कहा कि प्रणाली की खासियत केवल इसकी सटीकता नहीं है, बल्कि यह भी है कि किसी परिवार को मिला स्कोर क्यों आया, इसकी वजह समझी जा सकती है। इससे सरकारी अधिकारियों का निर्णय लेने पर नियंत्रण बना रहता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलता है।

मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि टिकाऊ शहरों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र की टीम ने ‘एयरावत ओएस’ प्रस्तुत किया है। यह उपग्रह, सेंसर, सरकारी रिकॉर्ड और मैदानी रिपोर्ट जैसे अलग-अलग स्रोतों से मिले आंकड़ों को एक साथ जोड़ता है। इसके आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसे सुझाव देती है, जिनकी जांच और व्याख्या की जा सकती है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों के अधिकारों को बदलना नहीं, बल्कि उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

समझौता ज्ञापन के तहत दूसरे चरण में ‘फैमिली स्कोर’ को आंध्र प्रदेश के सभी परिवारों तक पहुंचाने और इसे राज्य के आंकड़ा केंद्र से जोड़ने की योजना है। इस चरण में बड़े स्तर पर प्रणाली की जांच करने के साथ स्कोर को और बेहतर बनाया जाएगा।

वर्तमान सरकारी आंकड़ों के आधार पर आंध्र प्रदेश के करीब एक करोड़ बहत्तर लाख परिवारों में से एक करोड़ पैंतीस लाख यानी लगभग 75 प्रतिशत परिवारों के लिए ‘फैमिली स्कोर’ तैयार किया जा सकता है। इस प्रणाली को आईआईटी कानपुर के वाधवानी सेंटर फॉर डेवलपिंग इंटेलिजेंट सिस्टम्स और वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स ने एयरावत रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया है।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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