फर्जी भूमि उपयोग परिवर्तन आदेश का खुलासा, पेशकार निलंबित, एफआईआर दर्ज

WhatsApp Channel Join Now
फर्जी भूमि उपयोग परिवर्तन आदेश का खुलासा, पेशकार निलंबित, एफआईआर दर्ज


कानपुर, 02 जून (हि.स.)। नर्वल तहसील में न्यायालय द्वारा खारिज किए जा चुके एक भूमि उपयोग परिवर्तन प्रकरण में फर्जी आदेश तैयार कर उसे खतौनी में दर्ज कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। उपजिलाधिकारी के हस्ताक्षर स्कैन कर बनाए गए कथित आदेश का खुलासा फीडिंग प्रक्रिया के दौरान हुआ। मामले की जांच में प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने पर मंगलवार को वाचक/पेशकार अनुज त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर आरोपित कर्मचारी के खिलाफ नर्वल थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 336(3), 337 और 340(2) के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। साथ ही विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। ग्राम बिरहर की 0.41 हेक्टेयर भूमि को कृषि से अकृषक एवं औद्योगिक उपयोग के लिए घोषित करने संबंधी एक आदेश तहसील के कम्प्यूटर कक्ष में फीडिंग के लिए भेजा गया था। कम्प्यूटर ऑपरेटर रोहित भदौरिया को आदेश संदिग्ध प्रतीत हुआ, जिसके बाद मामले की जानकारी अधिकारियों को दी गई। जांच में पाया गया कि संबंधित आवेदन आवश्यक शपथपत्र, सहमति पत्र और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के कारण पहले ही न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा चुका था।

उपजिलाधिकारी नर्वल विवेक कुमार मिश्रा की जांच में सामने आया कि फीडिंग के लिए भेजे गए आदेश पर लगे हस्ताक्षर उनके नहीं थे, बल्कि उनके हस्ताक्षर स्कैन कर लगाए गए थे। आदेश का प्रारूप भी न्यायालय के अन्य आदेशों से भिन्न मिला। आरसीसीएमएस पोर्टल के अभिलेखों में भी संबंधित प्रकरण के निरस्त होने की पुष्टि हुई।

जांच के दौरान पेशकार अनुज त्रिपाठी से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायालयीय अभिलेखों और आदेशों के संरक्षण एवं गोपनीयता की जिम्मेदारी वाचक की होती है। ऐसे में निरस्त प्रकरण में फर्जी आदेश तैयार कर उसे खतौनी में दर्ज कराने के लिए भेजे जाने के मामले में उनकी प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Share this story