कजरी तीज पर लोधेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब
बाराबंकी, 14 सितंबर (हि.स.)। कजरी तीज के पावन पर्व पर सोमवार को महाभारतकालीन सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल लोधेश्वर महादेवा में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। सीतापुर, लखीमपुर, लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, बहराइच, जालौन और गोंडा समेत विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु बाबा लोधेश्वर के दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से पूरा धाम गुंजायमान रहा।
रविवार रात से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। रात 12 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। हाथों में जल से भरे लोटे, बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री लिए भक्त अपनी बारी का इंतजार करते रहे। श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनवांछित फल की कामना की।
कजरी तीज पर सुहागिन महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। बाबा से पति की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की गई। कई महिलाएं समूह में भजन-कीर्तन करते हुए मंदिर पहुंचीं।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर से लेकर गर्भगृह तक पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों ने कतारबद्ध तरीके से श्रद्धालुओं को दर्शन और जलाभिषेक कराया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे। व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जाती रही।
धरती से प्रकट हुआ था शिवलिंग
मंदिर के मुख्य पुजारी आदित्य तिवारी ने बताया कि लोधेश्वर महादेव का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार किसान लोधेराम अपने खेत में जुताई और सिंचाई कर रहे थे। पानी के बहाव को लेकर परेशानी होने पर उन्होंने फावड़े से जमीन की खुदाई की। इसी दौरान फावड़ा एक चट्टान से टकराया। स्थान की खुदाई करने पर वहां शिवलिंग दिखाई दिया। तभी से यह स्थान लोधेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
उन्होंने बताया कि कजरी तीज सहित प्रमुख पर्वों पर दूर-दराज के जिलों से श्रद्धालु बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। लोधेश्वर धाम आज भी लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
काशी की तर्ज पर आकार ले रहा भव्य कॉरिडोर
लोधेश्वर धाम को भव्य स्वरूप देने के लिए काशी की तर्ज पर कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। कॉरिडोर के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन, आवागमन और अन्य सुविधाएं और बेहतर होने की उम्मीद है। इससे लोधेश्वर धाम को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी

