जलवायु अनुकूलन पर लखनऊ में जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ, शिवराज सिंह चौहान होंगे मुख्य अतिथि

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जलवायु अनुकूलन पर लखनऊ में जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ, शिवराज सिंह चौहान होंगे मुख्य अतिथि


कानपुर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, कृषि को टिकाऊ बनाने और ग्रामीण आजीविका मजबूत करने के लिए लखनऊ में ग्रामीण भारत क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में विज्ञान और नीति आधारित उपायों पर चर्चा होगी।

यह बातें गुरुवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने आगामी जलवायु शिखर सम्मेलन के संबंध में कहीं।

आईआईटी कानपुर, वेटिकन सिटी की पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज और पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के सहयोग से तीन और चार नवंबर को लखनऊ में ग्रामीण भारत क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा। कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के माध्यम से होने वाले इस आयोजन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि होंगे।

सम्मेलन में बढ़ते तापमान, मानसून की अनिश्चितता, भूजल पर दबाव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और ग्रामीण आजीविका पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ कृषि, जल और ऊर्जा को एक साथ जोड़कर व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे। पुनर्योजी कृषि के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी विचार किया जाएगा।

दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष प्रो. जोआचिम वॉन ब्राउन, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे और कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी मौजूद रहेंगे।

विशेष सत्र में पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पद्म श्री से सम्मानित प्रो. अशोक गुलाटी और जल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध डॉ. राजेंद्र सिंह अपने विचार रखेंगे। इसके अलावा जल सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, जनस्वास्थ्य, मानसून विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले पलायन पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रीय अनुभवों, समुदाय आधारित प्रयासों और महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों को भी प्रमुखता दी जाएगी। आयोजन के माध्यम से ग्रामीण भारत में जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और नीतिगत निर्णयों के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Livevns.news Desk
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