गोरखपुर मैंगो फेस्टिवल रविवार को होगा आयोजित,पूर्वांचल की आम विरासत को देगा नई पहचान

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गोरखपुर मैंगो फेस्टिवल रविवार को होगा आयोजित,पूर्वांचल की आम विरासत को देगा नई पहचान


गोरखपुर मैंगो फेस्टिवल रविवार को होगा आयोजित,पूर्वांचल की आम विरासत को देगा नई पहचान


गोरखपुर मैंगो फेस्टिवल रविवार को होगा आयोजित,पूर्वांचल की आम विरासत को देगा नई पहचान


आम व्यंजन, रेसिपी प्रतियोगिता और निःशुल्क प्रवेश के साथ आयोजन बनेगा आकर्षण का केंद्र

गोरखपुर, 20 जून (हि.स.)। पूर्वांचल की मिट्टी में बसी आम की मिठास, इसकी परंपरागत प्रजातियों की विशिष्ट सुगंध और पीढ़ियों से चली आ रही आम उत्पादन की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से भारतीय सांस्कृतिक निधि, इंटेक गोरखपुर अध्याय की ओर से रविवार को गोरखपुर क्लब के सभागार में चतुर्थ आम महोत्सव “गोरखपुर आम महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव आम की प्रदर्शनी के साथ पूर्वांचल की कृषि परंपरा, स्थानीय स्वाद, जैव विविधता, घरेलू ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

यह जानकारी शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान “गोरखपुर आम महोत्सव” के आयोजक मंडल में शामिल अचिंत्य लहरी, डॉ. मुमताज खान, प्रो. शिवशरण दास, महावीर कंदोई और नीरज अस्थाना ने पत्रकारों को दी।

आयोजकों ने बताया कि आयोजन से संबंधित तैयारियों और महोत्सव की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल की भूमि सदियों से आम उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र रही है। यहां की अनेक परंपरागत आम प्रजातियां अपने स्वाद, सुगंध, बनावट और स्थानीय पहचान के कारण विशिष्ट स्थान रखती रही हैं। लेकिन समय के साथ व्यावसायिक प्रजातियों के बढ़ते प्रभाव से ये स्थानीय प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही हैं। इन्हीं प्रजातियों के संरक्षण, संवर्धन और उनकी उपयोगिता के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में इंटेक की ओर से आम महोत्सव की शुरुआत की गई थी।

इस पहल में प्रारंभ से ही क्षेत्र के आम उत्पादकों, उद्यान विभाग उत्तर प्रदेश सरकार, जीईएजी, महायोगी गुरु गोरक्षनाथ कृषि विज्ञान केंद्र तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग का सहयोग रहा है। इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष चतुर्थ आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय आम प्रजातियों को केवल स्मृति या स्वाद तक सीमित न रखकर उन्हें संरक्षण, उत्पादन, प्रसंस्करण, बाजार और जनसहभागिता से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि पूर्वांचल की आम प्रजातियां इस क्षेत्र की पहचान, परंपरा, स्वाद, श्रम, कृषि-ज्ञान और सांस्कृतिक स्मृति की जीवित धरोहर हैं। यदि समय रहते इन प्रजातियों को संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस अमूल्य प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा से वंचित हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि महोत्सव दो सत्रों में आयोजित होगा। पहला सत्र तकनीकी सत्र के रूप में दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चलेगा, जिसमें “पूर्वी उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में आम : विविधता एवं उत्पादन” विषय पर परिचर्चा होगी। इस सत्र में पूर्वांचल की प्रचलित आम प्रजातियों, उनके संरक्षण की चुनौतियों, उत्पादन की संभावनाओं, बागवानी तकनीक, रोग-कीट प्रबंधन, घरेलू उपयोग, प्रसंस्करण और आम उत्पादकों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा की जाएगी।

तकनीकी सत्र में आईसीएआर रहमानखेड़ा, लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष यादव आम की विविधता, वैज्ञानिक उत्पादन पद्धति और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेषज्ञ उद्बोधन देंगे। जिला उद्यान अधिकारी गोरखपुर पारसनाथ उद्यान विभाग की योजनाओं, सरकारी सहयोग, बागवानी की संभावनाओं और आम उत्पादकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर प्रकाश डालेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव आम उत्पादन में वैज्ञानिक तरीकों, पौध संरक्षण, रोग-कीट प्रबंधन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उपायों की जानकारी देंगे। वहीं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग की डॉ. अनुपमा कौशिक आम के पोषणीय महत्व, घरेलू उपयोग, आम आधारित उत्पादों और घरों में तैयार किए जा सकने वाले व्यंजनों पर उपयोगी जानकारी साझा करेंगी।

डॉ. शिव शरण दास, नुशरत अब्बासी, शिवेंद्र विक्रम सिंह एवं तलत अजीज आम उत्पादन, स्थानीय आम की प्रजातियों के संरक्षण, बाग प्रबंधन, बाजार की चुनौतियों और अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा करेंगे। इन अनुभवी उत्पादकों की सहभागिता से महोत्सव को जमीनी दृष्टि मिलेगी और आम उत्पादकों को व्यावहारिक समाधान प्राप्त होंगे।

दूसरा सत्र दोपहर 2:30 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें इस क्षेत्र में उत्पादित होने वाली विभिन्न आम प्रजातियों और आम से तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन को यह जानकारी दी जाएगी कि स्थानीय आम प्रजातियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी वर्तमान समय में लोकप्रिय व्यावसायिक प्रजातियां।

प्रदर्शनी में आम की विविधता, उनके स्वाद, उपयोगिता और घरेलू उत्पादों को देखने-समझने का अवसर मिलेगा।

महोत्सव में आम से बनने वाले विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों की बिक्री भी की जाएगी। कुछ प्रतिष्ठानों के साथ-साथ गृहणियां भी आम से तैयार व्यंजनों को प्रदर्शित और विक्रय करेंगी। इससे न केवल आम के घरेलू उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आम आधारित लघु उद्यमों और घरेलू उत्पादों की संभावनाओं को भी नई दिशा मिलेगी। इस अवसर पर आम से बनने वाले व्यंजनों की “रेसिपी प्रतियोगिता” भी आयोजित की जाएगी, जिसमें आम से तैयार पारंपरिक और नए व्यंजनों को प्रस्तुत किया जाएगा।

यह महोत्सव किसानों, आम उत्पादकों, विशेषज्ञों, गृहणियों, विद्यार्थियों और पूरे परिवार के लिए ज्ञान, स्वाद, संवाद और मनोरंजन का सुंदर संगम होगा। बच्चे आम की विविधता से परिचित होंगे, युवा स्थानीय कृषि विरासत का महत्व समझेंगे, गृहणियां आम आधारित व्यंजनों और उत्पादों के नए प्रयोगों से जुड़ेंगी तथा आम उत्पादक विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे।

इंटेक गोरखपुर अध्याय के संयोजक महावीर कंदोई ने शनिवार को आमजन से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में गोरखपुर क्लब सभागार पहुंचकर इस महोत्सव में सहभागी बनें और पूर्वांचल की अमिट आम विरासत को संरक्षित करने में अपना सहयोग दें। उन्होंने कहा कि स्थानीय आम प्रजातियों को बचाना केवल उत्पादकों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। महोत्सव में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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