पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ लखनऊ विवि के छात्रों ने किया प्रदर्शन

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पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ लखनऊ विवि के छात्रों ने किया प्रदर्शन


लखनऊ, 14 मई (हि.स.)। करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट 2026 पेपर लीक मामले और देशभर में लगातार बढ़ते परीक्षा घोटालों के खिलाफ गुरुवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर 1 पर छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), नेशनल स्टूडेंट्स यूथ फेडरेशन (एनएसवाईएफ), भीम आर्मी स्टूडेंट फेडरेशन (बीएएसएफ) और भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीएसएम) के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से सौंपा।

प्रदर्शन में छात्रों ने “एनटीए को भंग करो”, “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”, “पेपर लीक बंद करो”, “शिक्षा का निजीकरण बंद करो” जैसे नारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में देशभर में दर्जनों भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से प्रभावित हुई हैं, जिनसे करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। नीट-2026 पेपर लीक उसी व्यापक संकट का हिस्सा है, जिसने छात्रों के भीतर पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर गहरा अविश्वास पैदा किया है।

आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शान्तम निधि ने कहा कि आज देश का युवा लगातार परीक्षा घोटालों, बेरोजगारी और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण के बीच जी रहा है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन सरकार एक निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था तक सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। एनटीए पारदर्शिता का नहीं बल्कि केंद्रीकृत, अपारदर्शी और ठेका आधारित परीक्षा व्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। जब परीक्षा संचालन को निजी कंपनियों और ठेका मॉडल के हवाले किया जाएगा, तब पेपर लीक और संगठित भ्रष्टाचार लगातार बढ़ेंगे।

एनएसवाईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल राज ने कहा कि “लगातार हो रहे पेपर लीक यह साबित करते हैं कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। एक ओर रोजगार के अवसर लगातार कम किए जा रहे हैं, दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं को भ्रष्टाचार और माफिया नेटवर्कों के हवाले कर दिया गया है। मेहनत करने वाले छात्र आज असुरक्षा और निराशा के बीच जीने के लिए मजबूर हैं।

बीएएसएफ के उपाध्यक्ष वरुण आजाद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे बाजार और निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण, दलित, पिछड़े और मेहनतकश तबकों के छात्रों को उठाना पड़ता है। जब शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था दोनों मुनाफे और ठेका मॉडल के अधीन चली जाती हैं, तब समान अवसर का दावा खोखला हो जाता है।

बीएसएम के दीपांकर ने कहा कि “पेपर लीक अब अपवाद नहीं बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बनते जा रहे हैं। जब करोड़ों युवाओं का भविष्य कुछ केंद्रीकृत परीक्षाओं पर निर्भर हो और वही परीक्षाएं बार-बार भ्रष्टाचार और लीक से प्रभावित हों, तब यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय का प्रश्न बन जाता है।

ज्ञापन में छात्रों ने मांग की कि नीट- 2026 पेपर लीक मामले की सर्वोच्च न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को तत्काल भंग किया जाए, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, परीक्षा संचालन में निजी कंपनियों और ठेका मॉडल की भूमिका समाप्त की जाए तथा पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को न्याय और मुआवजा दिया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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