भारत-चीन संबंधों में आर्थिक संतुलन और साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती : विक्रम मणि तिवारी
कानपुर, 03 मई (हि.स.)। भारत और चीन के बीच बदलते संबंधों में आर्थिक संतुलन बनाना और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना आज सबसे बड़ी चुनौती है, साथ ही एआई और उन्नत तकनीकों में बढ़ता सहयोग भविष्य की दिशा तय करेगा। यह बातें रविवार को विक्रम मणि तिवारी ने कही।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के राजनीति विज्ञान विभाग में किए गए इस शोध में भारत और चीन के संबंधों के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। शोधार्थी विक्रम मणि तिवारी ने शीत युद्ध के बाद के वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच उभरती चुनौतियों और संभावनाओं का विस्तार से विश्लेषण किया।
अध्ययन के अनुसार उदारीकरण के बाद दोनों देशों के बीच नीतिगत संबंध अधिक जटिल हुए हैं, जिनके संतुलन के लिए ठोस रणनीति जरूरी है। पारंपरिक क्षेत्रों के साथ अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ रहा है।
शोध में आर्थिक पक्ष पर विशेष जोर देते हुए कहा गया है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव कर व्यापारिक संबंधों को इस तरह संतुलित करना चाहिए, जिससे आर्थिक सुरक्षा बनी रहे। घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और आर्थिक निर्भरता को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक सुधारों की आवश्यकता बताई गई है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से साइबर सुरक्षा को बड़ी चुनौती बताया गया है। चीन की तकनीकी प्रगति को देखते हुए भारत को अपने साइबर ढांचे को मजबूत करने और एआई आधारित आधुनिक तकनीकों को विकसित करने पर बल दिया गया है।
अंत में शोधार्थी विक्रम मणि तिवारी ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, शिक्षकों और सहयोगी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

