हमीरपुर मे धूप न निकलने से गेहूं की फसल पड़ने लगी पीली

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हमीरपुर मे धूप न निकलने से गेहूं की फसल पड़ने लगी पीली


नव वर्ष के तीसरे दिन बदली व शीतलहर से जनजीवन अस्त व्यस्त

हमीरपुर, 03 जनवरी (हि.सं.)। उत्तर प्रदेश केे हमीरपुर जिले में नववर्ष के तीसरे दिन जिले में बदली और शीतलहर ने जनमानस को बेहाल कर दिया। पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे और सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन बढ़ गई। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते कई दिनों से कोहरे और शीतलहर का प्रकोप लगातार जारी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के अनुसार गुरुवार को दोपहर में कुछ देर धूप निकलने के बाद शाम होते ही कोहरा छा गया था। घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के साथ हुई। शनिवार को भी पूरे दिन बदली और ठंडी हवाओं के कारण बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर सन्नाटा पसरा रहा। आवश्यक कार्यों से बाहर निकलने वाले लोग सर्दी से कांपते नजर आए। शाम ढलते ही गलन बढ़ने से ठंड का असर और तेज हो गया। शीतलहर और कोहरे का असर किसानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले एक पखवाड़े से लगातार पड़ रहे कोहरे के कारण फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धूप न निकलने से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है, जिससे किसान चिंतित हैं। इसके अलावा मटर, मसूर और अरहर जैसी दलहनी फसलें भी कोहरे के कारण प्रभावित हो रही हैं।

किसानों के अनुसार, कोहरे की वजह से सरसों की फसल में परागण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस समय अधिकांश सरसों के पौधों में फूल आ चुके हैं, लेकिन परागण ठीक से न होने के कारण फलियां नहीं बन पा रही हैं। बड़ी संख्या में फूल झड़ रहे हैं, जिससे सरसों की पैदावार पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। मटर की फसल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। धूप के अभाव में मटर के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। किसान दुर्गेश द्विवेदी ने बताया कि बीते सप्ताह मटर की फसल में सिंचाई कराई गई थी, लेकिन उसके बाद से लगातार कोहरा छाए रहने के कारण खेतों में नमी बढ़ गई और पौधों का रंग पीला पड़ने लगा है, जिससे फसल के कमजोर होने का खतरा है।

पतारा गांव के किसान रामकिशोर, सुरेश और भोला ने बताया कि इस समय तिलहन वर्ग की अधिकांश फसलों में फूल आने की अवस्था चल रही है, लेकिन कोहरे के कारण परागण बाधित हो रहा है। इससे फलियां नहीं बन पा रही हैं और किसान भविष्य को लेकर आशंकित हैं। इस संबंध में कृषि रक्षा इकाई के तकनीकी सहायक अजित कुमार शुक्ला ने किसानों को सलाह दी है कि वे गेहूं की फसल में एनपीके 19,19 का छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि एनपीके 19,19 पाउडर का घोल बनाकर छिड़काव करने से फसल में पोषक तत्वों की कमी दूर होगी और फसल पुनः प्राकृतिक अवस्था में लौट आएगी। लगातार जारी सर्दी और मौसम की मार से जहां आम जनजीवन प्रभावित है, वहीं किसान भी मौसम साफ होने की आस लगाए बैठे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा

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