छात्रों को एआई का केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि बनना होगा रचनाकार : आनंदी बेन पटेल

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छात्रों को एआई का केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि बनना होगा रचनाकार : आनंदी बेन पटेल


कानपुर, 13 सितंबर (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डरने के बजाय इसे समझकर समाज की जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए। छात्रों को एआई का केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि रचनाकार बनना होगा। विज्ञान, साहित्य और भाषा समेत हर विषय को एआई से जोड़कर उसके व्यावहारिक प्रयोग पर जोर दिया जाना चाहिए। यह बातें रविवार को प्रदेश की राज्यपाल एवं सीएसजेएमयू की कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने रविवार को विश्वविद्यालय में दो दिवसीय एआई मंथन-2.0 के समापन सत्र में कही।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में सात लाख से अधिक छात्र एआई का पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं। अब विद्यार्थियों को ऐसे मॉडल विकसित करने चाहिए, जो किसानों, दिव्यांगजनों और मरीजों के काम आ सकें। एआई के जरिए सिंचाई की जरूरत, रोग की पहचान और फसल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी समाधान तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और विरासत को सुरक्षित रखने में भी एआई के इस्तेमाल पर जोर दिया।

कुलाधिपति ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक कार्यों में एआई के प्रयोग और शिक्षकों व छात्रों को एआई साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में भी एआई प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय मंथन में कैंसर की पहचान से लेकर फसल प्रबंधन तक विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रयोग पर चर्चा हुई।

सीएसजेएमयू के प्रो. आलोक कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय में एआई प्रमोशन सेल बनाया गया है। 15 विद्यार्थी एआई इंटर्न के रूप में 22 परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनमें छह पूरी हो चुकी हैं। रोबोटिक्स, ड्रोन, सुपरकंप्यूटर, साइबर सिक्योरिटी और आईओटी लैब भी स्थापित की गई हैं।

एचबीटीयू की प्रो. वंदना दीक्षित कौशिक ने बताया कि शिक्षा, शोध और प्रशासन में एआई को शामिल किया गया है। एआईएमएल में बीटेक, सिग्नल प्रोसेसिंग एवं मशीन लर्निंग में एमटेक और कई एआई आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। ‘एआई फॉर एवरीवन’ कोर्स के तहत 720 विद्यार्थियों को प्रमाणित किया गया।

केजीएमयू के डॉ. दुर्गेश कुमार द्विवेदी ने स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के इस्तेमाल की जानकारी दी। वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद के. त्यागी ने शिक्षण, शोध, परीक्षा और प्रशासन में एआई के बढ़ते प्रयोग की जानकारी दी। कृषि क्षेत्र में डॉ. एसयूएस राजू ने प्रिसिजन फार्मिंग में एआई की भूमिका बताई।

राज्यपाल के ओएसडी डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने कहा कि एआई मंथन से उच्च शिक्षा में इसकी संभावनाओं और चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने एआई नीति सलाहकार और क्रियान्वयन समूह बनाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई को मास्टर नहीं, असिस्टेंट के रूप में इस्तेमाल करना होगा और विश्वविद्यालयों के बीच नवाचार के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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