आकाशवाणी सिर्फ प्रसारण नहीं, लोगों की भावनाओं का मंच है : नेहा गुप्ता

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आकाशवाणी सिर्फ प्रसारण नहीं, लोगों की भावनाओं का मंच है : नेहा गुप्ता


--‘हवामहल’ से ‘भूले-बिसरे गीत’ तक तीन पीढ़ियों से दिलों पर राज कर रहा रेडियो

प्रयागराज, 12 जून (हि.स)। बदलते दौर में तकनीक जरूर बदली है, लेकिन आकाशवाणी की साख और श्रोताओं का प्यार आज भी 90 साल पुराना है। आज रेडियो सिर्फ गाड़ी या घर के कोने में बजने वाला डिब्बा नहीं रहा, बल्कि मोबाइल ऐप के जरिए दुनिया के कोने-कोने में पहुंच चुका है। यह बातें आकाशवाणी प्रयागराज की सहायक निदेशक नेहा गुप्ता ने कहीं।

शुक्रवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित संवाद श्रृंखला ‘विमर्श’ में बतौर मुख्य वक्ता नेहा गुप्ता बोल रही थीं। इस बार चर्चा का विषय ‘आकाशवाणी के 90 वर्ष: इतिहास, वर्तमान और भविष्य’ था। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य वक्ता के साथ केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

--77 साल पुराना है प्रयागराज से रिश्ताउन्होंने यादों के पन्ने पलटते हुए बताया कि आकाशवाणी प्रयागराज का सफर 1 फरवरी, 1949 को शुरू हुआ था। प्रयागराज, कौशाम्बी, चित्रकूट और प्रतापगढ़ के लोगों की सुबह और शाम दशकों से इसी की आवाज से सजती आई है। अब डिजिटल क्रांति के इस दौर में आकाशवाणी ने खुद को बदला है। मोबाइल ऐप के जरिए अब प्रयागराज केंद्र के कार्यक्रम दुनिया के किसी भी कोने में सात समंदर पार बैठे लोग भी लाइव सुन रहे हैं।

चर्चा के दौरान नेहा गुप्ता ने उन सदाबहार कार्यक्रमों का जिक्र किया जो आज भी देश की धड़कन हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए रेडियो के कार्यक्रमों जैसे ‘आखिर ऐसा क्या जादू है’ ‘हवामहल’, ‘जयमाला’, ‘पिटारा’, ‘भूले बिसरे गीत’, ‘छायागीत’, ‘आज के फनकार’, ‘उजाले उनकी यादों के’, ‘सखी सहेली’ और ‘किसान भाइयों’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा ये हमारी संस्कृति और यादों का हिस्सा हैं। यही वजह है कि आज डिजिटल युग में भी इनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई।

कार्यक्रम के सूत्रधार आकाश अग्रवाल के सवाल ‘इस डिजिटल और रील के ज़माने में आकाशवाणी का भविष्य क्या है और जब यह 100 साल की होगी तब इसकी भूमिका क्या होगी?’ इस पर जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि आकाशवाणी आने वाले वक्त में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपनाएगी, लेकिन अपनी साख और मूल पहचान से समझौता नहीं करेगी। जब हम शताब्दी वर्ष मनाएंगे, तब आकाशवाणी और ज्यादा दमदार, सीधे जनता से जुड़ने वाली और एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म के रूप में खड़ी होगी।’

इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य वक्ता नेहा गुप्ता को अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी उर्मिला शर्मा, कार्यक्रम प्रभारी कृष्णमोहन द्विवेदी, सहायक कार्यक्रम अधिशाषी मधुकांक मिश्रा, धीरेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव आदि लोग उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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