'धीरेन्द्र शास्त्री लगाते हैं दरबार, क्यों नहीं देते रक्षा मंत्रालय को अपनी सेवाएं' : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ममता बनर्जी का किया बचाव, सीएम योगी पर भी साधा निशाना
धीरेन्द्र शास्त्री के दरबार पर उठाए सवाल
81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा के 28वें दिन झांसी और जालौन में प्रवास कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चाहे धीरेन्द्र शास्त्री हों या कोई अन्य व्यक्ति जो दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं और भविष्य की बातें बताते हों, उन्हें अपनी कथित शक्तियों का उपयोग देश के हित में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में किसी को आने वाली घटनाओं की जानकारी पहले से हो सकती है तो रक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय कर देश को प्राकृतिक आपदाओं, सुरक्षा चुनौतियों और अन्य संकटों के बारे में पहले से सचेत किया जाना चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में विभिन्न धार्मिक दरबारों और चमत्कारों को लेकर बहस चलती रही है। उनके बयान को सीधे तौर पर बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
गविष्ठि यात्रा के दौरान उठाया गौ-रक्षा का मुद्दा
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा पर हैं। यात्रा के 28वें दिन उन्होंने झांसी और जालौन क्षेत्र में गौ-रक्षा के समर्थन में जनसंपर्क और सभाएं कीं। यात्रा का उद्देश्य गौ-हत्या और गौ-तस्करी के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाना तथा समाज को गौ-संरक्षण के प्रति जागरूक करना बताया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ पर भी साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र धारण कर लेने से कोई व्यक्ति साधु नहीं बन जाता। साधु की पहचान उसके आचरण, विचार और समाज के प्रति समर्पण से होती है। उनके इस बयान को राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि योगी आदित्यनाथ स्वयं नाथ परंपरा से जुड़े संत हैं और लंबे समय से गेरुआ वस्त्र धारण करते रहे हैं।
ममता बनर्जी का किया बचाव, केंद्र सरकार से पूछे सवाल
पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर भी शंकराचार्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और सीमा प्रबंधन केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक भारत में प्रवेश कर रहे हैं तो इसके लिए राज्य सरकारों को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि जब सीमा सुरक्षा का दायित्व केंद्र के पास है तो आखिर अवैध घुसपैठ कैसे हो रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के हालिया बयानों को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से वे गौ-रक्षा, धर्म, राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं। झांसी में दिए गए उनके ताजा बयान से धार्मिक और राजनीतिक दोनों हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने एक साथ धार्मिक दरबारों, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
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