देवरिया : नागरी प्रचारिणी सभा में मनाई गई पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी की जयंती, पुस्तक का लोकार्पण

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देवरिया : नागरी प्रचारिणी सभा में मनाई गई पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी की जयंती, पुस्तक का लोकार्पण


देवरिया : नागरी प्रचारिणी सभा में मनाई गई पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी की जयंती, पुस्तक का लोकार्पण


देवरिया, 24 अक्टूबर (हि.स.)। नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया के तत्वावधान में पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी की जयंती एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह आज आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा, राजनीति, समाज निर्माण और हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान को याद किया। इस अवसर पर सभा के पूर्व मंत्री इन्द्र कुमार दीक्षित द्वारा लिखित पुस्तक ‘नागरी प्रचारिणी सभा : इतिहास एवं परिचय’ का लोकार्पण किया गया।

मुख्य अतिथि प्रो. जयप्रकाश नारायण द्विवेदी, पूर्व निदेशक द्वारिकाधीश संस्कृत एकेडमी एवं इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, द्वारका, गुजरात ने कहा कि पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी में अनेक गुणों का समुच्चय था। उन्होंने शिक्षा, राजनीति, समाज निर्माण और भाषा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी पीढ़ियां धन्य हैं। उन्होंने कहा कि इन्द्र कुमार दीक्षित ने संस्था का इतिहास लिखकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस कार्य से उन्होंने अपनी परंपरा को जीवंत बनाया है।

मुख्य वक्ता प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी, पूर्व कुलपति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ने कहा कि पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी सहज और सुलभ व्यक्तित्व के धनी थे। जननायक में यह गुण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने शिक्षा, संस्था निर्माण और स्वभाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने किसी संस्था को अपने नियंत्रण में रखने के बजाय समाज को समर्पित कर दिया। यह उनके विशाल हृदय का परिचायक है। उन्होंने कहा कि लोकार्पित पुस्तक नागरी प्रचारिणी सभा के इतिहास को समझने और पूर्वजों के योगदान को जानने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

विशिष्ट वक्ता प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी को याद करना स्वाधीनता और आदर्श मूल्यों को याद करना है। उस दौर के लोग कुर्सी की चिंता नहीं करते थे, बल्कि जीवन मूल्यों को महत्व देते थे। उन्होंने नागरी प्रचारिणी सभा के विकास में अमूल्य योगदान दिया। स्वाधीनता आंदोलन और भाषा आंदोलन का एक-दूसरे से गहरा संबंध था। दोनों ने एक-दूसरे को मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाना समाज और देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

सभा के डॉ. राजेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी महान व्यक्तित्व के धनी थे। उनके पदचिह्नों पर चलने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभा को हर प्रकार का सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दयाशंकर कुशवाहा की वाणी वंदना से हुआ। रंधा यादव और रेनू गुप्ता ने गांधीजी का प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ प्रस्तुत किया। सभा के मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए पं. सच्चिदानन्द नाथ त्रिपाठी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। सभा के कोषाध्यक्ष सरोज कुमार पांडेय ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभय कुमार द्विवेदी ने किया। समारोह के अंत में राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद सभा के आजीवन सदस्य एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के मंत्री रामनिवास पांडेय के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और दो मिनट का मौन रखा गया।

इस अवसर पर डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. मोहन पांडेय भ्रमर, नंदलाल मणि, शशिबिंदु नारायण मिश्र, डॉ. मनोज कुमार, कमल नयन चतुर्वेदी, प्रार्थना राय, कीर्ति त्रिपाठी, पार्वती देवी गौरा, गोपाल कृष्ण सिंह रामू, ऋषिकेश मिश्र, रमेश चंद्र त्रिपाठी, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, अरुण कुमार राव, भृगुदेव मिश्र, जगदीश उपाध्याय, रजनीश मोहन गोरे, जितेंद्र प्रसाद तिवारी, डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी, हेमचंद्र नाथ त्रिपाठी, आत्म प्रकाश मिश्र, सुबास राय, सौदागर सिंह, कौशल किशोर मणि, चतुरानन ओझा, नित्यानंद तिवारी, दिनेश कुमार त्रिपाठी, विजय भारत सिंह, विजय प्रकाश श्रीवास्तव, संजय राव, गोरखनाथ गुप्त, अभिषेक मिश्र, विशाल मिश्र, अनिल कुमार मिश्र, अनुज कुमार सिंह, ब्रजेश पांडेय, वरुण पांडेय और विभूति नारायण ओझा मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

Livevns.news Desk
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