देवरिया : हिंदू सम्राट दल के दुर्गा पूजा पंडाल में विधि विधान से 151 महिलाओं ने की आरती
देवरिया, 12 अक्टूबर (हि.स.)। देवरिया नगर पालिका रोड स्थित हिंदू सम्राट दल का दुर्गा पूजा पंडाल नवरात्र में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक सजावट और भव्य स्वरूप में तैयार पंडाल में मां दुर्गा की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद पंडाल के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। इसके बाद से मां के दर्शन के लिए भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई है।
पंडाल की सबसे खास पहचान 151 महिलाओं की सामूहिक आरती है। नवरात्र के पहले दिन से ही महिलाएं सुबह और शाम एक साथ मां दुर्गा की आरती कर रही हैं। घंटा-घड़ियाल की गूंज, शंखनाद और देवी गीतों से पूरा परिसर भक्तिमय बना हुआ है। सामूहिक आरती में शामिल होने के लिए महिलाएं उत्साह के साथ पहुंच रही हैं। आरती के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा की स्तुति करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
हिंदू सम्राट दल के अध्यक्ष मद्धेशिया ने बताया कि वर्ष 2003 में कुछ कार्यकर्ताओं ने आपसी सहयोग से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की शुरुआत की थी। उस समय आयोजन सीमित संसाधनों के बीच किया गया था। धीरे-धीरे स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ती गई और पूजा का स्वरूप भव्य होता गया। पिछले 22 वर्षों से कार्यकर्ता और क्षेत्रीय लोग मिलकर इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। हर वर्ष आयोजन को आकर्षक बनाने के साथ ही धार्मिक गतिविधियों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
इस बार करीब 30 बाई 36 फीट क्षेत्रफल में पंडाल तैयार किया गया है। इसकी ऊंचाई लगभग 20 फीट है। पंडाल को आकर्षक डिजाइन और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। भीतर स्थापित मां दुर्गा की 12 फीट ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है। शाम होते ही रोशनी से जगमगाता पंडाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। आसपास के क्षेत्रों से भी लोग मां के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
नवरात्र के नौ दिनों तक पंडाल में भजन-कीर्तन, देवी गीत, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ जुटने की उम्मीद है। दशहरे के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा की विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी।
आयोजन समिति के अनुसार, पूजा की तैयारियों से लेकर पंडाल की सजावट और अन्य व्यवस्थाओं तक में स्थानीय लोग आर्थिक सहयोग के साथ श्रमदान भी करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आने-जाने के अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन और पुलिस का सहयोग लिया जा रहा है। सामूहिक प्रयास से आयोजित यह पूजा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का भी संदेश दे रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

