देवरिया : गांव से हर साल बाहर जा रहा 56.68 करोड़ रुपये, ग्रामीण बोले-24 उत्पादों का उद्यम यहीं लगा सकते हैं

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देवरिया : गांव से हर साल बाहर जा रहा 56.68 करोड़ रुपये, ग्रामीण बोले-24 उत्पादों का उद्यम यहीं लगा सकते हैं


देवरिया : गांव से हर साल बाहर जा रहा 56.68 करोड़ रुपये, ग्रामीण बोले-24 उत्पादों का उद्यम यहीं लगा सकते हैं


देवरिया, 17 सितंबर (हि.स.)। गांव में रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च यदि स्थानीय कारोबार का आधार बने तो बाहर जा रहा पैसा गांव की अर्थव्यवस्था में ही रह सकता है। सदर ब्लॉक के बढ़या बुजुर्ग गांव में गुरुवार को जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल और नेचरसोल फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित ‘संवाद-अभाव से अवसर की ओर’ कार्यशाला में ग्रामीणों ने गांव की आर्थिक और उद्यम संभावनाओं को समझा। इस दौरान आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर दिया गया।

फैसिलिटेटर व लिपोक सोशल फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर सचिन गोरे ने बताया कि, सर्वे के अनुसार बढ़या बुजुर्ग से हर साल करीब 56.68 करोड़ रुपये विभिन्न उत्पादों की खरीदारी में बाहर जा रहे हैं। उन्होंने रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले 60 उत्पादों की सूची ग्रामीणों के सामने रखी और स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा सकने वाले उत्पादों की पहचान कराई। ग्रामीणों ने सरसों तेल, सूजी, मैदा, नमकीन, डिटर्जेंट समेत 24 उत्पादों को गांव में तैयार करने योग्य माना।

जागृति के उद्यम कोर मार्कंडेय दयाल त्रिपाठी ने सर्वे के आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने आलू का उदाहरण देते हुए कहा कि किसान से 10 रुपये किलो खरीदा गया आलू बाहर का कारोबारी चिप्स बनाकर 200 से 300 रुपये किलो तक में बेचता है। ऐसे में ग्रामीण अपने उत्पादों में मूल्यवर्धन कर स्थानीय स्तर पर उद्यम खड़ा कर सकते हैं।

जागृति बायोरिजनल सीओई के ऑपरेशंस मैनेजर आनंद सिंह ने कहा कि यह एक दिन की गतिविधि नहीं है। संस्था एक वर्ष तक ग्रामीणों के साथ काम करेगी और कार्यशाला में सामने आई उद्यम संभावनाओं को मूर्त रूप देने में सहयोग करेगी।

कार्यशाला में नेचरसोल फाउंडेशन के संस्थापक विजय मणि, जागृति के ऑपरेशंस एसोसिएट मनोज तिवारी, राहुल रंजन, कंसल्टेंट हंसिका सिंह, सोक्रेट्स संस्था के रोहित सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

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